मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) ने साफ कर दिया है कि झारखंड में मेडिकल की 350 सीटों के लिए नामांकन होगा. एमसीआइ की टीम झारखंड आयी थी और यहां के तीनों मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण किया था. आशंका जतायी जा रही थी कि एमसीआइ की टीम असंतुष्ट है और सीटों की संख्या घटा सकती है.
ऐसे में एमसीआइ का सीटें बरकरार रखने का निर्णय झारखंड के लिए वरदान है. कई सालों से एमसीआइ की टीम आती है, निरीक्षण करती है, कमियां निकालती है और धमकाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि झारखंड के तीनों मेडिकल कॉलेजों में इंफ्रास्ट्रर ठीक नहीं है. मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या इस पर निर्भर करती है कि वहां क्या-क्या सुविधाएं हैं. तीनों मेडिकल कॉलेजों में कई ऐसी कमियां हैं जो सीटें बढ़ाने में बाधक हैं.
मेडिकल कॉलेजों के पास पैसों की कमी नहीं है, पर बेहतर प्रबंधन नहीं होने से यहां पढ़नेवाले छात्र-छात्राओं पर तलवार लटकती रहती है. मेडिकल कॉलेजों में अगर अच्छी लाइब्रेरी, प्रयोगशाला वगैरह न हो, तो अच्छे डॉक्टर कैसे निकलेंगे? जब एमसीआइ की टीम निरीक्षण करने आती है तो किसी तरह साफ-सफाई कर, नयी-नयी मशीन रख कर उन्हें भरमाने का प्रयास किया जाता है.
क्यों नहीं इन कॉलेजों में इतनी अच्छी बेहतर व्यवस्था हो कि टीम जब भी आये, निरीक्षण करे, उसे कमी न मिले? राज्य में सिर्फ तीन सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं. रांची में रिम्स, जमशेदपुर में एमजीएम मेडिकल कॉलेज और धनबाद में पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज. इनमें सीटों की संख्या 350 है. इतना बड़ा राज्य और मेडिकल सीटें सिर्फ 350! अब समय आ गया है जब राज्य में नये मेडिकल कॉलेज खुलें और पुराने कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़े.
ऐसा करने से हर साल ज्यादा छात्र एमबीबीएस की डिग्री लेकर निकलेंगे. अपने राज्य में चिकित्सकों की किल्लत है, चिकित्सा सुविधा का अभाव है. ऐसे में सीट तो बढ़े ही, साथ ही सुविधा इतनी बेहतर हो ताकि क्वालिटी के डॉक्टर इन कॉलेजों से निकल सकें.
ऐसा करके ही राज्य का भला किया जा सकता है. सरकार इतना जरूर देखे कि एमसीआइ ने कमी दूर करने के आश्वासन पर सीटों की संख्या नहीं घटायी है. इसलिए कमियों को दूर करना होगा.
