क्रिकेट को राजनीति में न घसीटें

पिछले दिनों पीसीबी के चैयरमैन शहरयार खान कोलकाता आये थे. भारत-पाकिस्तान क्रि केट श्रृंखला बहाल कराने के प्रस्ताव के साथ. बीसीसीआइ ने भी उन्हें नाराज नहीं किया और आश्वासन दिया कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारतीय टीम साल के अंत में पाकिस्तान के साथ तीन टेस्ट, पांच वनडे, और दो टी-20 मैच खेलने […]

पिछले दिनों पीसीबी के चैयरमैन शहरयार खान कोलकाता आये थे. भारत-पाकिस्तान क्रि केट श्रृंखला बहाल कराने के प्रस्ताव के साथ. बीसीसीआइ ने भी उन्हें नाराज नहीं किया और आश्वासन दिया कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो भारतीय टीम साल के अंत में पाकिस्तान के साथ तीन टेस्ट, पांच वनडे, और दो टी-20 मैच खेलने के लिए आबुधाबी जायेगी.
जैसे ही यह खबर दोनों मुल्को के क्रिकेट प्रेमियों तक पहुंची, इस महामुकाबले का इंतजार शुरू हो गया. पर यह बात हमारी राजनीति के चंद ठेकेदारों को रास ना आयी, और वे लग गये लोकसभा में विरोध करने.
विरोध भाजपा के एक सांसद ने शुरू किया ही था कि उन्हें शिवसेना का साथ मिल गया. वे 26/11 का हवाला देकर पाकिस्तान के साथ कोई भी सबंध रखने के विरोध में थे. पर यह बात समझ में नही आती कि विरोध का शिकार सिर्फ क्रिकेट क्यों? मजे की बात है कि जिस देश को दुश्मन बता कर उसके साथ भारत के क्रिकेटीय रिश्ते का विरोध करते हैं, उसी देश के प्रधानमंत्री को शपथ ग्रहण सामारोह का न्योता भेजते हैं और उनकी मेहमानवाजी करते हैं. और-तो-और उसी देश के पूर्व क्रिकेटरों को आइपीएल टीमों का कोच बनाया जाता है और उनसे कमेंट्री भी करायी जाती है. पर जब बात आपस में क्रिकेट खेलने की आती है तब वे रिश्तों की बात करते हैं.
एक तरफ मोदीजी पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने की बात करते है, तो दूसरी तरफ उन्हीं के कुछ साथी क्रि केटीय रिश्ते को ही खत्म करने पर तुले हैं. जबकि क्रिकेट ही दोनों मुल्कों को करीब ला सकता है. मैं राजनीति के ठेकेदारों से गुजारिश करना चाहूंगा कि धर्म बन चुके इस खेल को अपनी गंदी राजनीति का शिकार न बनायें.
शशि शेखर बल, देवघर

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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