संकट में सबको अपनी ही जान प्यारी

एक बार फिर अजीब महौल देखने को मिला. अचानक आये भूकंप ने रिश्तों की डोर और कमजोर कर दी. सभी लोग अपनी-अपनी जान बचा कर भागे. सबने अपने परिवार और दोस्तों से पहले अपनी जान की फिक्र की. हर कोई चाह रहा था कि सबसे पहले मैं खुले में पहुंचूं और खुद को सुरक्षित कर […]

एक बार फिर अजीब महौल देखने को मिला. अचानक आये भूकंप ने रिश्तों की डोर और कमजोर कर दी. सभी लोग अपनी-अपनी जान बचा कर भागे. सबने अपने परिवार और दोस्तों से पहले अपनी जान की फिक्र की. हर कोई चाह रहा था कि सबसे पहले मैं खुले में पहुंचूं और खुद को सुरक्षित कर लूं. उस समय न बाप बेटे का ओर न बेटा बाप का. भक्त अपने भगवान को छोड़ कर सड़कों पर भागते नजर आये.
इस भूकंप का अहम कारण है प्रकृति से छेड़छाड़. पेड-पौधों को काटना, पहाड़-पत्थर तोड़ कर अपने काम के लिए इस्तेमाल करना ऐसी ही हरकते हैं. हमें इन्हें न नष्ट करने की कसम खानी पड़ेगी. सारे इनसानों को जागरूक होना पड़ेगा. पेड़-पौधे लगाना होगा, पहाड़ो को बचाना होगा. कोई ऐसा कार्य भूल कर भी न करना होगा जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता हो.
मोहम्मद इरफान अली, गोपालगंज

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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