जिंदगी की कीमत लगाना आसान नहीं है. चाहे वह अमीर की जान हो या फिर किसी गरीब की, उसे इस तरह सरेआम ले लेना उचित नहीं ही हो सकता है. 13 साल पहले सलमान खान की गाड़ी से हुई घटना में एक व्यक्ति की जान चली गयी.
जिसकी जान गयी, उसे वापस नहीं लाया जा सकता और न ही उसके परिवार के लोगों को उसकी भरपाई की जा सकती है. यह सोचने की बात है कि हमारे गरीब भाई आज भी फुटपाथ पर सोने को मजबूर क्यों हैं? आखिर क्या बात है कि उन्हें रात में सोने तक के लिए छत मयस्सर नहीं है.
आजादी से लेकर आज तक हम औद्योगिक विकास को ही महत्व देते आये हैं, लेकिन गरीबी उन्मूलन के लिए कारगर कदम क्यों नहीं उठाये जाते. औद्योगिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने से देश में अमीर बढ़ रहे हैं, लेकिन गरीबों की स्थिति यथावत क्यों है?
प्रमित मिश्र, ई-मेल से
