एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला

‘ये जब्र भी देखा है तारीख की नजरों ने/लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पायी’. बांग्लादेश-भारत सीमा पर बसी दर्जनों बस्तियों की हकीकत यही रही है. लेकिन, भारत की 111 और बांग्लादेश की 51 बस्तियों की अदला-बदली पर संसद की सर्वसम्मति से लगी मुहर के बाद बेहतरी की उम्मीद बनी है. इस विवाद […]

‘ये जब्र भी देखा है तारीख की नजरों ने/लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पायी’. बांग्लादेश-भारत सीमा पर बसी दर्जनों बस्तियों की हकीकत यही रही है. लेकिन, भारत की 111 और बांग्लादेश की 51 बस्तियों की अदला-बदली पर संसद की सर्वसम्मति से लगी मुहर के बाद बेहतरी की उम्मीद बनी है.
इस विवाद का इतिहास 1713 में मुगलों और कूच बिहार के राजा के बीच समझौते से शुरू होता है तथा 1947 के विभाजन के दौरान रेडक्लिफ ने भी इसकी जटिलता को नजरअंदाज कर दिया था. नतीजतन भारतीय सीमा के भीतर पूर्वी पाकिस्तान (1971 से बांग्लादेश) की कुछ जमीन और बस्तियां आ गयीं तथा उनकी सरहद में भी भारतीय क्षेत्र पड़ गये. दोनों पक्षों को अपने-अपने इलाकों और उसमें बसे नागरिकों तक पहुंचने में परेशानी होती थी. खेती करने, आने-जाने, पशुचारण आदि को लेकर भी तनाव की स्थिति बनी रहती थी.
1958 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री फिरोज खान नून के बीच और फिर 1974 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर्रहमान के बीच कुछ क्षेत्रों की अदला-बदली के करार भी हुए, लेकिन भारतीय राजनीति की अंदरुनी खींचतान ने इन समझौतों को लागू होने से रोके रखा था. 2011 में प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने समझौते को लागू करने की कोशिश की तो भाजपा और कुछ क्षेत्रीय दलों ने इसका जोरदार विरोध किया था. लेकिन, गत वर्ष सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में जब बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से कहा था कि ‘आप मुझ पर भरोसा रखिये’, तब किसी बड़े फैसले की उम्मीद बन गयी थी.
अब भारत ने अपनी अधिक जमीन खोकर भी इस मामले को सुलझाने में जो परिपक्वता दिखायी है, उससे दक्षिण एशिया में विश्वास और सहयोग के नये अध्याय का सूत्रपात हो सकता है.
भारत और बांग्लादेश अपनी 4060 किलोमीटर लंबी सीमा तथा व्यापक जल-संसाधनों के आधार पर वृहत आर्थिक सहयोग की ओर बढ़ सकते हैं. संभवत: इसकी सकारात्मक झलक प्रधानमंत्री की जून के पहले हफ्ते में संभावित बांग्लादेश यात्र के दौरान दिखायी भी दे. बांग्लादेश के सहयोग से भारत पूर्वी एशिया में सहभागिता बढ़ाने की नयी राह प्रशस्त कर सकता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >