सिर्फ कैंडल मार्च से नहीं निकलेगा हल

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार भारत में औसतन प्रतिदिन सात से 10 घटनाएं बलात्कार की होती हैं. उनके बारे में अखबार या टीवी में खबरें प्रसारित की जाती हैं, उन्हें पढ़ और देख कर लोग या तो उसकी निंदा करके अपना कर्तव्य पूरा मान लेते हैं या फिर कुछ ऐसे संगठन पैदा हो जाते […]

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार भारत में औसतन प्रतिदिन सात से 10 घटनाएं बलात्कार की होती हैं. उनके बारे में अखबार या टीवी में खबरें प्रसारित की जाती हैं,
उन्हें पढ़ और देख कर लोग या तो उसकी निंदा करके अपना कर्तव्य पूरा मान लेते हैं या फिर कुछ ऐसे संगठन पैदा हो जाते हैं, जो सिर्फ नाम के लिए धरना-प्रदर्शन करने पर आमादा होते हैं. कैंडल मार्च के जरिये विरोध जताना उनका पहला कर्तव्य है. जबकि आधुनिक न्याय प्रणाली में पीड़िता को न्याय और दोषियों को सजा मिलने में वर्षो लग जाते हैं.
लेकिन कोई बलात्कार के कारणों की ओर ध्यान नहीं देता. आखिर इसका उपाय क्या है? इसका निदान भी समाज को ही खोजना है. यह एक सामाजिक समस्या है और जब तक इस समस्या का निदान निकाल नहीं लिया जाता, सिर्फ कैंडल मार्च से ही काम नहीं चलेगा.
मनोरथ सेन, ई-मेल से

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