झारखंड में स्थानीयता की परिभाषा अधिकतर नेता अपने राजनीतिक चश्मे से देख कर देते रहे हैं. उन्हें डर है कि अगर सबको झारखंडी की संज्ञा से अलग रखा, तो चुनाव में हार का सामना करना पड़ेगा.
इसीलिए वे सबको झारखंडी बनाने पर तुले हैं. लेकिन मैं पूछता हूं कि सभी झारखंडी कैसे हो गये? रांची में ही, जब भी मेन रोड पर अलग झारखंड के लिए जुलूस निकलता था, तो उसमें सारे आदिवासी-मूलवासी ही तीर-धनुष लेकर शामिल होते थे. बाकी लोग व्यंग्यात्मक दृष्टि से देखते थे.
बाहर से लोग यहां काम के जुगाड़ में आये, यहां तो किसी ने उन्हें नहीं रोका. अब अगर यहीं से कोई काम की तलाश में कश्मीर या पश्चिम बंगाल चला जाये, तो क्या वह कश्मीरी या बंगाली हो जायेगा? क्या वहां की सरकार उन्हें मुफस्सिल कार्यालय या सचिवालय में नौकरी देगी? नहीं न!
दशरथ बड़ाईक, बिरसा चौक, रांची
