हाल ही में खाद्य सुरक्षा बिल पारित होने पर जहां सत्तारूढ़ दल अपनी पीठ थपथपा रहा है, वहीं अन्नाद्रमुक को छोड़ कर किसी भी दल ने इसका किंचित भी विरोध नहीं किया. कोई भी लोकलुभावन योजना दिखने में कितनी ही लोक-हितकारी क्यों न हो, लेकिन क्रियान्वयन के स्तर पर जाते-जाते यह दलालों, बिचौलियों के हित में ज्यादा हो जाती है.
आज के राजनीतिज्ञ, जो सूचना के अधिकार से अपने को बाहर रखने पर, अपने वेतन भत्ता बढ़ाने पर, सजा होने पर चुनाव न लड़ पाने के न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक हो जाते हैं, उनसे ज्यादा त्यागी राजनीतिज्ञों की पूर्व पीढ़ी थी, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की.
उन महापुरुषों के संघर्ष का लाभ आज आजादी के 66 साल बाद भी देश की उस जनता को नहीं मिला, जो गरीब, उपेक्षित है. लाभ मिला तो सिर्फ भ्रष्टाचारियों को.
दीपक कुमार सिंह, हंटरगंज, चतरा
