कांग्रेस की राह पर है भाजपा

नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान काले धन की वापसी का मुद्दा बड़े जोर-शोर से उठाया था. इसके दम पर भाजपा ने अकेले बहुमत हासिल किया और सत्ता में आयी. देश की जनता ने मोदी जी पर भरोसा व्यक्त किया. उन्होंने सोचा कि काले धन की वापसी से […]

नरेंद्र मोदी के नेतृत्ववाली केंद्र सरकार ने लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान काले धन की वापसी का मुद्दा बड़े जोर-शोर से उठाया था. इसके दम पर भाजपा ने अकेले बहुमत हासिल किया और सत्ता में आयी. देश की जनता ने मोदी जी पर भरोसा व्यक्त किया. उन्होंने सोचा कि काले धन की वापसी से अच्छे दिन आयेंगे.
देशकी अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और विकास को गति मिलेगी, परंतु सौ दिनों में काले धन की वापसी का सपना अधूरा ही रह गया.
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने यह वादा किया था कि विदेशों में जमा भारतीय काले धन को सरकार सौ दिनों में वापस लायेगी और प्रत्येक परिवार के बैंक खाते में 15 लाख रुपये जमा कर दिये जायेंगे.
सत्ता में आने के बाद मोदी और उनकी सरकार में शामिल भाजपाई इस वादे को भूल गये. मोदीजी की सरकार केंद्र में आने के बाद संवेदनहीन प्रतीत होने लगी और उसने गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार पर ध्यान नहीं दिया. अपनी असफलता को सरकार ने जन-धन योजना तथा स्वच्छता अभिान के माध्यम से छिपाने का प्रयास किया, परंतु दिल्ली के चुनाव परिणामों से यह साफ होता है कि सरकार के प्रति जनता की अलोकप्रियता कितनी प्रबल हो चुकी है. मैं यह मानता हूं कि कांग्रेस के 60 सालों के भ्रष्ट कार्यकाल ने देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर किया है, जिसकी क्षतिपूर्ति सौ दिनों में नहीं की जा सकती, परंतु बड़े तथा झूठे वादों द्वारा जनता को गुमराह किया जाना भी कहां तक न्यायसंगत है?
हाल ही में अमित शाह द्वारा दिये गये बयान में उन्होंने कालाधन वापसी को मात्र एक चुनावी जुमला बताया था. इससे साफ है कि भाजपा भी अब कांग्रेस की नीति अपना रही है, जिसका खमियाजा उसे आनेवाले दिनों में भुगतना होगा.
सुब्रत नंद, तेलाई, सरायकेला खरसावां

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