आत्ममंथन से ही रुकेगा बाल विवाह

वैसे तो बाल विवाह का प्रचलन अब लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन अब भी हमारे देश में बहुत से ऐसे गांव हैं जहां बाल विवाह हो रहा है. उन जगहों पर लड़कियों की शादी 15 से 16 वर्ष की उम्र में ही कर दी जाती है. इससे उनकी शारीरिक और बौद्धिक क्षमता का हनन […]

वैसे तो बाल विवाह का प्रचलन अब लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन अब भी हमारे देश में बहुत से ऐसे गांव हैं जहां बाल विवाह हो रहा है. उन जगहों पर लड़कियों की शादी 15 से 16 वर्ष की उम्र में ही कर दी जाती है. इससे उनकी शारीरिक और बौद्धिक क्षमता का हनन होता है.
हाल ही में सुनने को मिला था कि गिरिडीह जिले के सभी मंदिरों में पंडित जी किसी लड़की का विवाह कराने से पहले उस लड़की का बर्थ सर्टिफिकेट देखेंगे, ताकि बाल विवाह की बात उठ भी न सके. लेकिन यह कहां तक संभव हो पाया? अगर पंडित जी अपने फैसले पर टिके होते, तो आज गिरिडीह से प्रेरित होकर दूसरे जगह के लोग भी इसका अनुसरण करते. लेकिन अफसोस, ऐसा हो न सका. इसकी वजह है हर क्षेत्र में फैला भ्रष्टाचार. इसके अलावा हमें आत्ममंथन की भी जरूरत है, तभी स्थिति सुधरेगी.
शुभम कुमार गुप्ता, गिरिडीह

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