आज जब सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ी है, रफ्तार बढ़ी है, इनके साथ ही दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं. इस बीच अनेक खेल हो रहे हैं. जैसे ही किसी की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती है, कुछ छुटभैये नेता लाश के साथ सड़क जाम कर देते हैं और मुआवजे की मांग करने लगते हैं.
यह आम बात हो गयी है. यहां छोटी-छोटी बात पर छुटभैये नेता सड़क जाम कर देते हैं, जिससे दूरदराज आने-जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. स्कूल बस, एंबुलेंस के साथ-साथ कैदी वाहन को भी घंटों इंतजार करना पड़ता है. आखिर कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है. अगर सड़क जाम नहीं हो, तो प्रशासन जागता भी नहीं है और दुर्घटना के शिकार होने वाले परिवार को मुआवजा भी नहीं मिलता. अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन, छुटभैये नेताओं, मुआवजे के बीच आम जनता को परेशानी क्यों?
प्रताप तिवारी, देवघर
