नियम-कानून से कुछ नहीं होगा

पटना में किसी स्कूल की तसवीर जिसमें दिखाया गया है कि अभिभावक दो-तीन मंजिला इमारत पर बाहर से चढ़ कर बच्चों को नकल करने में मदद कर रहे हैं, इन दिनों चर्चा का विषय है. कई मंत्री, अफसर, शिक्षाविद ्चर्चाएं कर रहे हैं. सबकी अलग-अलग राय है. किसी की राय नया नियम-कानून, तो किसी का […]

पटना में किसी स्कूल की तसवीर जिसमें दिखाया गया है कि अभिभावक दो-तीन मंजिला इमारत पर बाहर से चढ़ कर बच्चों को नकल करने में मदद कर रहे हैं, इन दिनों चर्चा का विषय है. कई मंत्री, अफसर, शिक्षाविद ्चर्चाएं कर रहे हैं. सबकी अलग-अलग राय है.
किसी की राय नया नियम-कानून, तो किसी का मानना है कि इसके लिए अभिभावक जिम्मेदार हैं. पर सवाल यह है कि क्या नया नियम-कानून से कोई विद्यार्थी सुधर सकता है? अगर ऐसा होता तो अब तक कई सुधर जाते. क्योंकि पहले ही कई नियम-कानून लागू हैं. और बात रही अभिभावक की, तो अपने बच्चे के मोह में उनका सही-गलत भूलना जाहिर है. जितने ज्यादा नियम-कानून बनेंगे, नकल के उतने ही तरीके बच्चे निकाल लेंगे. बस जरूरत है बचपन से अच्छी शुरुआत की. विद्यार्थियों की अंतरात्मा को जगाने की.
पालुराम हेंब्रम, पूर्वी सिंहभूम

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