पुस्तकालय का होना आवश्यक

कहते हैं कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और पुस्तकें उसका माध्यम होती हैं, जो हमें देश-परिवेश में घटनेवाली घटनाओं, परिघटनाओं और विविध प्रचलनों से रूबरू कराती हैं. किसी भी समाज के विकास में पुस्तकों का खास महत्व होता है. इसके लिए पुस्तकालय का होना आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य भी है. मेरी राय है […]

कहते हैं कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और पुस्तकें उसका माध्यम होती हैं, जो हमें देश-परिवेश में घटनेवाली घटनाओं, परिघटनाओं और विविध प्रचलनों से रूबरू कराती हैं. किसी भी समाज के विकास में पुस्तकों का खास महत्व होता है. इसके लिए पुस्तकालय का होना आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य भी है.

मेरी राय है कि इसके लिए पूरे राज्य में जिला स्तर पर हर दो किलोमीटर पर पुस्तकालय की व्यवस्था की जानी चाहिए. इससे फायदा यह होगा कि हर व्यक्ति, खास कर छात्र-छात्रएं इससे लाभान्वित हो सकेंगे. यह ऐसी जगह होगी, जहां लोग आकर शांतिपूर्वक पठन-पाठन करने के साथ-साथ प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी भी कर सकते हैं, सामूहिक अध्ययन कर सकते हैं. इससे शैक्षणिक संस्कृति एवं सांस्कृतिक चेतना का विकास संभव है.

गुलाम गौस, बांसजोड़ा, धनबाद

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >