पारा बनाम गैर पारा की लड़ाई है जारी

इन दिनों चल रही प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति प्रक्रि या गले की हड्डी बनती जा रही है. ज्यों-ज्यों यह प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, इसकी खामियां खुल कर सामने आ रही है. एक ओर जहां सफल अभ्यर्थियों के पौ बारह है, वहीं पिछड़ रहे अभ्यर्थी नियमावली के असंवैधानिक प्रारूप के शिकार हो रहे हैं. आरक्षण का […]

इन दिनों चल रही प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति प्रक्रि या गले की हड्डी बनती जा रही है. ज्यों-ज्यों यह प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, इसकी खामियां खुल कर सामने आ रही है. एक ओर जहां सफल अभ्यर्थियों के पौ बारह है, वहीं पिछड़ रहे अभ्यर्थी नियमावली के असंवैधानिक प्रारूप के शिकार हो रहे हैं.
आरक्षण का भी कमोबेश यही हाल है. एक ओर जहां जातिगत आरक्षण का एक बार लाभ ले चुके अभ्यर्थी सामान्य वर्ग में घड़ल्ले से प्रवेश पा रहे हैं, वहीं पारा शिक्षक की श्रेणी में आनेवाले वैसे अभ्यर्थी जिसने आरक्षण का लाभ नहीं लिया उसे कथित गैर पारा श्रेणी के पदों पर दाखिल होने से रोका जा रहा है.
इस अराजक स्थिति की ओर या तो सचेतकों का ध्यान गया ही नहीं या फिर सभी दुराग्रह से ग्रसित हैं. हर कदम पर खामियां मिलने पर सर्वसाधारण कितनी बार कोर्ट की शरण में जा सकता है.
शेखर प्रसाद, सारठ, देवघर

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