पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है. लोगों तक सच पहुंचाने के लिए हम पत्रकार अपनी जान तक की परवाह नहीं करते. दुनियाभर में फैली हमारी बिरादरी हर तरह के हालात से लड़ते हुए काम कर रही है, ताकि लोकतंत्र जीवंत रहे, धड़कता रहे. गलत की जीत और सही की हार न हो. हमारी बिरादरी के कई लोग पेरिस में फिर मारे गये हैं. हम तो बस अपना काम कर रहे थे. वही कर रहे थे, जो हमें करना चाहिए. वे आये और हमें भून कर चले गये. वे समझते हैं कि ऐसा करके वे हमें डरा देंगे. लेकिन वे गलत हैं. हम पत्रकार इसलिए बने हैं कि सच के लिए लड़ सकें.
जीवन भर हम एक मिशन पर हैं. एक पत्रकार के तौर पर काम करने से पहले ही हम यह निश्चय कर लेते हैं कि अब से पूरा समाज, पूरा देश, पूरी दुनिया हमारा परिवार है. हमें उनके हक के लिए आवाज उठानी है. चाहे इसके लिए कोई भी कुरबानी क्यों न देनी पड़े. हम दिन भर फील्ड में दौड़ते हैं. खबरें जमा करते हैं. फोटो खींचते हैं. वीडियो शूट करते हैं. बम धमाके हों या आतंकी हमले, सीमा पर युद्ध हो या समंदर में सुनामी, चक्रवात आये या भूकंप, हम हर परिस्थिति में अपनी परवाह किये बिना दौड़ पड़ते हैं, ताकि सब तक सही सूचनाएं पहुंचायी जा सकें. लोगों को आगाह किया जा सके. कई बार हम दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. हम पर हमले भी होते हैं, पर हम भी कोई कच्ची मिट्टी के नहीं बने हैं. तब तक डटे रहते हैं, जब तक कि तन-मन काम करना न बंद कर दे. चौबीसों घंटे हम कहीं भी जाने को तैयार रहते हैं. जाड़ा-गरमी, धूप-बरसात, किसी की हम परवाह नहीं करते. हमारे सिर पर तो बस एक ही जुनून सवार होता है कि कितनी जल्दी मौके पर पहुंचे. कितनी जल्दी खबर अपने पाठकों, अपने दर्शकों तक पहुंचाएं. हम भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं. सरकार की नीतियों की समीक्षा करते हैं. योजनाओं के लागू होने की पड़ताल करते हैं. जरूरतमंदों की आवाज बनते हैं. निर्धनों को उनका हक दिलाने का प्रयास करते हैं.
सरकार की अनुचित नीतियों पर व्यंग्य करते हैं. हम खबर लिखते हैं. लेख लिखते हैं. कविता और कहानी भी लिखते हैं. कैमरे से रिपोर्टिग करते हैं. फोटो और वीडियो निकाल कर लोगों तक पहुंचाते हैं. हर उस जरिये का इस्तेमाल करते हैं, जिसके माध्यम से हम लोकतंत्र को पटरी पर रख सकें. हम देर रात घर पहुंचते हैं. घरवाले हमारा इंतजार करके, थक कर सो जाते हैं. रास्ते में हमें देख कर कुत्ते भौंकते हैं. घर पहुंच कर हम अकेले भोजन करते हैं. रिश्तेदारों ओर दोस्तों से मिलने तक का समय नहीं निकाल पाते हैं. फिर भी हम पूरी ऊर्जा के साथ डटे रहते हैं. चाहे कोई हमारा सिर काटे, चाहे हम पर गोलियां बरसाये, पर हम तो पत्रकार हैं. मिशन जर्नलिज्म पर हैं. हम तो ऐसे ही चलते रहेंगे. अपना काम करते रहेंगे.
शैलेश कुमार
प्रभात खबर, पटना
shaileshfeatures@gmail.com
