आतंक के खिलाफ एकजुट होना होगा

स्वतंत्रता-समानता-भाईचारा के रूप में दुनिया को आधुनिक लोकतंत्र का सबक सिखानेवाला फ्रांस इस समय शोक में डूबा है. राष्ट्रपति ओलांदे ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा है कि मानवता के विकास की राह रोकने के लिए खड़ी किसी भी कट्टरता को जीतने नहीं दिया जायेगा. पेरिस की जिस धरती पर चार सौ साल […]

स्वतंत्रता-समानता-भाईचारा के रूप में दुनिया को आधुनिक लोकतंत्र का सबक सिखानेवाला फ्रांस इस समय शोक में डूबा है. राष्ट्रपति ओलांदे ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा है कि मानवता के विकास की राह रोकने के लिए खड़ी किसी भी कट्टरता को जीतने नहीं दिया जायेगा. पेरिस की जिस धरती पर चार सौ साल पहले अभिव्यक्ति की आजादी और सहिष्णुता का संदेश देते हुए वाल्तेयर ने कहा था कि ‘मैं आपके विचारों से सहमत न हो पाऊं तो भी विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की मैं रक्षा करूंगा’, उसी धरती पर तर्क और बुद्धि की राह पर बढ़ती मानवता की राह में खड़ी कट्टरताओं का विरोध करनेवाले 10 पत्रकारों को आतंकियों ने मौत की नींद सुला दी.

यह घटना आतंकवाद के उस बढ़ते खतरे को नये सिरे से रेखांकित करती है, जिससे आज पूरी दुनिया को जूझना पड़ रहा है. इसने दुनिया को फिर से आगाह किया है कि यदि कट्टरपंथी सोच पर लगाम नहीं लगाया गया, तो इसके दुष्परिणाम दुनिया के किसी कोने में दिल दहला सकते हैं.

अखबार शार्ली एब्दो का अकीदा है कि धर्मनिरपेक्षता फ्रांस के ‘संस्थापक मिथकों’ में एक है. इसी के अनुरूप अखबार के कवर पेज पर माइकेल होलबेक के उपन्यास ‘सबमिशन’ का मजाक उड़ाया गया था. उपन्यास में जिक्र है कि 2022 में फ्रांस में इसलामी कठमुल्लों का शासन होगा और फ्रांस मध्यकालीन शासनादेशों से संचालित किया जायेगा. अखबार ने इस उपन्यास को फ्रांस में इसलाम के प्रति पैदा होती मनोरुग्ण भय-भावना का संकेत माना. आतंकी हमले में मारे गये प्रधान संपादक स्टीफन शाबोनिएर बताना चाहते थे कि फ्रांस का जन-मानस बहु-सांस्कृतिकता के सम्मान के प्रति अपनी वचनबद्धता से डिग रहा है. वे बताना चाहते थे कि फ्रांस की आबादी में इसलाम माननेवालों की संख्या है तो साढ़े सात फीसदी ही, पर फ्रांस की जनता आइएसआइएस और अलकायदा की कारस्तानियों के बीच पूरे यूरोप में आप्रवासियों की बढ़ती तादाद के बीच मानने लगी है कि फ्रांस की आबादी में इसलाम माननेवालों की संख्या 30 फीसदी तक हो चली है. अखबार ने इसे ‘इसलामोफोबिया’ कहा, यानी एक मनोरोग. इससे पहले अखबार ने एक ट्वीट में आइएसआइएस के सरगना अबू बकर अल बगदादी का काटरून पेश किया था. इसमें बगदादी लोगों को नववर्ष के शुभकामना संदेश में कहता है कि ‘जश्न मेरे नियमों के हिसाब से मनाओ’. अखबार ने 2011 में ‘शरीआ एब्दो’ नाम से एक काटरून छापा था, जिसे कट्टरपंथियों ने पैगंबर मोहम्मद का अपमान बताते हुए अखबार के दफ्तर पर बम गिराये थे और अलकायदा के मुखपत्र में अखबार को इसलाम का दुश्मन बताया गया था.

तब शाबोनिएर ने कहा था कि ‘मैं कलम चला रहा हूं, हथियार नहीं’. यह साहसी कलम कट्टरपंथी हथियारों के आगे नहीं झुकी, लेकिन बर्बरता ने अब उसे तोड़ दिया है.

किसी की अभिव्यक्ति से आपकी असहमति हो सकती है. आप उसे मानने या न मानने के लिए स्वतंत्र हो सकते हैं. लेकिन, विरोधी स्वर को खामोश कर देने या दूसरों पर अपनी सोच जबरन थोपने की इजाजत किसी भी धर्म में नहीं है. बावजूद इसके विभिन्न धर्मो की रक्षा के नाम पर कट्टरता आज दुनियाभर में अपना दायरा बढ़ा रही है. अपनी-अपनी कट्टर सोच को देश-दुनिया पर थोपने को आतुर संगठन इराक, सीरिया और नाइजीरिया से लेकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और भारत तक में आतंक के नये-नये रूप और रंग में सामने आ रहे हैं. उनके निशाने पर सिर्फ अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र के समर्थक ही नहीं हैं, बल्कि अब तो उन्हें न मासूमों का कत्ल करने से गुरेज है, न ही औरतों पर बेइंतहा जुल्म ढाने से. ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स, 2014 के मुताबिक 2013 में आतंकवाद से होनेवाली मौतें 2012 के मुकाबले 61 फीसदी बढ़ी हैं. 2013 में दुनियाभर में करीब 10 हजार आतंकी हमले हुए, जो 2012 के मुकाबले 44 फीसदी ज्यादा थे.

आज हर रोज दुनिया के किसी न किसी कोने में गरज रहीं आतंकी बंदूकें मानवता के विकास क्रम को मानो पूरी तरह पलट देना चाहती हैं, समाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देना चाहती हैं. वह चाहे बामियान की बुद्ध-प्रतिमा हो, लंदन का रेलवे स्टेशन, न्यूयार्क का वल्र्ड ट्रेड सेंटर, सिडनी का कैफे या फिर हिंदुस्तान का संसद-भवन, ये सब व्यक्ति की आजादी के ठिकाने ही तो हैं. इन पर चलती बंदूकें असल में मानवता के अब तक के विकास की कहानी पर एकबारगी लगाम लगाने को आतुर हैं. इस धार्मिक कट्टरता और आतंकवाद से कई देशों में लोकतंत्र पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. इसलिए इन्हें तुरंत खामोश कराने के लिए विश्व को पहले कहीं ज्यादा ताकत और तत्परता के साथ सक्रिय होने की जरूरत है.

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