खुद सुधरें, तब देश सुधरेगा

जब भी कोई नेता किसी घोटाले में सजा पाता है तो हम हाय-तौबा मचाने लगते हैं और जगह-जगह उनके समर्थन में नारे लगाये जाते हैं, यह हमारे समाज और देश की विडंबना ही है.ऐसी मानसिकता से देश का कुछ भला नहीं होनेवाला. इन नेताओं पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए और देश और समाज से […]

जब भी कोई नेता किसी घोटाले में सजा पाता है तो हम हाय-तौबा मचाने लगते हैं और जगह-जगह उनके समर्थन में नारे लगाये जाते हैं, यह हमारे समाज और देश की विडंबना ही है.ऐसी मानसिकता से देश का कुछ भला नहीं होनेवाला. इन नेताओं पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए और देश और समाज से गद्दारी करने के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

दु:ख की बात है कि मीडिया भी इसी राह पर है. जब तक हम लोग अपने निजी स्वार्थ, जाति-धर्म से ऊपर नहीं उठेंगे, तब तक इस देश पर माफिया और बेईमान देश द्रोही शासन करेंगे.

जिस देश की जनता की सोच और व्यवहार इतना घटिया, संकीर्ण और स्वार्थी हो, वह समाज एक दिन रसातल में निश्चित जायेगा. यहां आत्म-निरीक्षण की जरूरत है. जरूरत है पहले खुद को सुधारने की, तब देश सुधरेगा.

– बल बहादुर थापा, रांची

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