हरा-भरा हो देश हमारा

आज देश में विकास की दौड़ है. हमारी सरकार देश को विकसित, समृद्ध और शक्तिशाली बनाने के लिए तरह-तरह की योजनाओं को हमारे समक्ष प्रस्तुत कर रही है, जिसकी झलक हमें देखने को मिल भी रही है. कहने का तात्पर्य है कि हमारा देश विकास की ओर अग्रसर तो हो रहा है, लेकिन दूसरी तरफ […]

आज देश में विकास की दौड़ है. हमारी सरकार देश को विकसित, समृद्ध और शक्तिशाली बनाने के लिए तरह-तरह की योजनाओं को हमारे समक्ष प्रस्तुत कर रही है, जिसकी झलक हमें देखने को मिल भी रही है.

कहने का तात्पर्य है कि हमारा देश विकास की ओर अग्रसर तो हो रहा है, लेकिन दूसरी तरफ सरकार के साथ-साथ लोग भी पर्यावरण से दूर होते जा रहे हैं. आज हमारे देश में विकास परियोजनाओं के नाम पर पेड़-पौधों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है, जिससे हरियाली खत्म होती जा रही है और धरती का तापमान बढ़ता जा रहा है.

आश्चर्य की बात है कि लोग शिक्षित होने के बावजूद पेड़-पौधों की अहमियत नहीं समझ रहे हैं और उन्हें खत्म करने पर तुले हैं.

जिन पेड़-पौधों से हमें जीने के लिए प्राय: सब कुछ प्राप्त हो रहा है, उन्हें ही हम अपने क्षणिक लाभ के लिए काटे जा रहे हैं. रहने के लिए घर से लेकर बड़े-बड़े कल-कारखानों, मॉल आदि के लिए बड़े पैमाने पर पेड़-पौधे काटे जा रहे हैं. इसके चलते आज शहरी क्षेत्रों में काफी प्रदूषण फैल चुका है.

ऑक्सीजन की कमी के कारण लोग जहरीली गैसों को ग्रहण कर रहे हैं, परिणामस्वरूप उन्हें भयंकर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है. उपरोक्त सभी समस्याओं में प्रमुख है वर्षा की कमी तथा इसकी अनियमितता है, जिसके फलस्वरूप किसानों को उचित समय पर जल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है और महंगाई जैसी समस्याओं से जनता को जूझना पड़ रहा है.

एक ओर हमारा देश विकास की ओर अग्रसर हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर पतन की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है. अत: हम सभी देशवासियों को देश की प्रगति में हाथ बंटाने के साथ ही ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण भी करना चाहिए, जिससे हमारा पर्यावरण और देश संतुलित बना रहे.

ओमप्रकाश प्रसाद, ई-मेल से

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