सावन के पहले सोमवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर में शिवभक्त कांवड़ियों पर पुलिस ने जो लाठियां बरसायीं, वह व्यथित करनेवाली घटना थी. कांवड़ियों का दोष सिर्फ इतना था कि वे अपने आराध्य के अभिषेक के लिए मंदिर गये थे और भीड़ की वजह से थोड़ी अव्यवस्था फैली थी. तभी वहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूजा के लिए आये, जिससे लोगों पर आफत ही टूट पड़ी.
अनुशासन और सुरक्षा के नाम पर कांवड़ियों की बेरहमी से पिटाई हुई. बेहतर होता कि मंदिर में पहले से ही सख्त व्यवस्था की जाती, जिससे लोगों को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता. कहा जाता है भगवान के दरबार में राजा और प्रजा में कोई फर्क नहीं होता, लेकिन इस घटना ने इस कथन को भी गलत ठहरा दिया है. पूरे उत्तर भारत में कांवड़ मेला में भक्तों का सैलाब है. ऐसे में प्रशासन और कांवड़ियों को एक-दूसरे का पूरा सहयोग करना चाहिये.
रूपेश कुमार, पटना
