सरकार की नीतियों का खुलासा

नीरजा चौधरीराजनीतिक विश्लेषक निर्मला सीतारमण के रूप में देश में एक महिला बार वित्त मंत्री बनना अपने आप में एक बेहतरीन राजनीतिक सूझ-बूझ है. इंदिरा गांधी भी वित्त मंत्री रही थीं, लेकिन वे प्रधानमंत्री होते हुए वित्त मंत्री थीं. निर्मला सीतारमण ने बहुत शानदार तरीके से अपनी हर बात रखी और कई दफा तो उन्होंने […]

नीरजा चौधरी
राजनीतिक विश्लेषक

निर्मला सीतारमण के रूप में देश में एक महिला बार वित्त मंत्री बनना अपने आप में एक बेहतरीन राजनीतिक सूझ-बूझ है. इंदिरा गांधी भी वित्त मंत्री रही थीं, लेकिन वे प्रधानमंत्री होते हुए वित्त मंत्री थीं. निर्मला सीतारमण ने बहुत शानदार तरीके से अपनी हर बात रखी और कई दफा तो उन्होंने जोर देकर कहा कि मैं फिर से इस बात को कहना चाहती हूं, ताकि आप सबको समझ में आ जाये. उनकी बातों में गर्मजोशी थी, कहीं हल्के-फुल्के नहीं रहीं, न शब्दों में न वाक्यों में.
महिलाओं के लिए ‘नारी, तू नारायणी’ का स्लोगन देना, स्वसहायता समूहों को ताकत देने की बात करना, विवेकानंद को कोट करना आदि निर्मला को एक अच्छे वित्त मंत्री के रूप में दिखाता है. इस वक्त देश में महिलाओं का झुकाव भाजपा और मोदीजी की तरफ है, इस बात का खासा ख्याल रखा और महिलाओं को मजबूत करने की बातें कही. इन सब बातों के मद्देनजर हम देखते हैं कि यह केंद्रीय बजट पूरी तरह से राजनीतिक और परसेप्शन (संवेदन) को भुनानेवाला है.
बजट एक चुनौती होता है
बजट हमेशा सरकारों के लिए एक चुनौती रहा है. यह बजट भी मोदी-2 सरकार के लिए एक चुनौती है. बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था को लेकर है और उसमें भी नौकरियों को लेकर है. आगे आनेवाले समय में जब भी चुनाव आयेंगे, तो यह एक मुद्दा उठेगा. भारती की जनसंख्या में युवाओं की बड़ी आबादी है और अगले छह महीने में भारत की औसत आयु 29 साल होनेवाली है.
इसलिए जो सबसे ज्वलंत मुद्दा है, वह नौकरियों और आजीविका का है. वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी है, इसकाे भी हमें देखना होगा. चीन-अमेरिका में चल रहा ट्रेड वार भी अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहा है और अगले साल अमेरिका में चुनाव होने तक इसके कम होने की भी संभावना नहीं है. वैश्विक गतिविधियां भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर डालेंगी.
भाजपा का संवेदन प्रबंधन
भाजपा की सरकार हमेशा परसेप्शन (संवेदन) का बड़ी ही खूबी से प्रबंधन करती है. इस बजट में भी उसने ऐसा ही किया है. जनता के सामने अपना एक बहुत बड़ा लक्ष्य रख दिया है कि अगले चार-पांच साल में भारत की अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन डॉलर की हो जायेगी. लोगों में इस लक्ष्य की संवेदना यह बनी कि देश आगे बढ़ेगा. लेेकिन, देश कैसे आगे बढ़ेगा, नौकरियां कहां से आयेंगी, पूंजी कहां से आयेगा, इन बातों में सराकर गयी ही नहीं. यह खूबी है भाजपा सरकार की.
सरकार की नीयत का खुलासा
देश की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बहुत शानदार तरीके से बजट भाषण दिया. उस भाषण में निर्मला ने जो खुलासा किया, वह सिर्फ नीयत का खुलासा था, करना क्या है इस बात का खुलासा नहीं था. मसलन, निर्मला ने साफ कहा कि पांच साल पहले जब भाजपा सत्ता में आयी थी, तब एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था थी, जिसे सरकार ने ढाई ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा तक पहुंचा दिया है. अब निर्मला ने फिर कहा है कि आगामी पांच साल में भारतीय अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन होगी, लेकिन कैसे होगी, यह नहीं बताया.
आगे क्या करेगी सरकार
बजट में भाजपा सरकार की उपलब्धियों की घोषणा भी दिखी, और जहां-जहां सकारात्मक हो रहा है, उसके बारे में उन्होंने बताया. जैसे कि प्रत्यक्ष कर पिछले चार साल में तेजी से बढ़ाया है और एनपीए घट गया है. लेकिन नकारात्मक तथ्यों और आंकड़ों को सफाई से छिपा गयीं. उन्होंने डेढ़-दो घंटे तक भाषण दिया, लेकिन तथ्यात्मक आंकड़ों के बारे में कोई बात नहीं की. उसके बारे में सिर्फ इतना ही कहा कि आंकड़े उनके पास रखे दस्तावेज में है. यह उचित नहीं था, क्योंकि बजट आंकड़ों के बारे में ही होता है. पूरे भाषण से यही निकलकर आया है कि आगे उनकी मंशा क्या करने की है.
छोटी बातें, बड़े लक्ष्य
हाउसिंग लोन, टैक्स, हर गांव में बिजली-पानी पहुंचाना और छोटे-छोटे कई फायदों की बात तो की गयी है, लेकिन पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का स्वरूप क्या होगा, इसके बारे में कोई रोडमैप नहीं दिया गया है. क्योंकि अर्थव्यवस्था को सात या आठ प्रतिशत की वृद्धि दर तक पहुंचाना एक बड़ा लक्ष्य है. हालांकि, हर छोटी-छोटी बातों से यही जाहिर किया गया है कि सरकार क्या-क्या करने जा रही है और उसके लक्ष्य क्या हैं. देश की आम जनता को बहुत छोटी-छोटी बातें ही समझ में आती हैं, बजट में इसी बात को राजनीतिक तरीके से भुनाया गया है.
युवाओं के बारे में
निर्मला सीतारमण ने भारत के युवाओं के लिए देश में एक न्यू नेशनल एजुकेशनल पॉलिसी और रिसर्च फाउंडेशन की बात तो की, लेकिन युवाओं को रोजगार को लेकर दृष्टि का अभाव भी दिखा. आज के दौर में रोजगार को हर हाल में अहमियत देने की जरूरत है. हालांकि, मेक इन इंडिया आदि को बढ़ावा देने की बात कही गयी है, लेकिन इसे लेकर दूरदृष्टि का अभाव नजर आया. कृषि क्षेत्र का भी यही हाल था, इसमें भी दूरदर्शिता का अभाव रहा.
इस बजट में आम आदमी को फायदा पहुंचाने की कई सारी बातें कही गयी हैं. चाहे वह साल 2022 तक सभी के लिए आवास का लक्ष्य हो या फिर हर गांव तक बिजली और गैस कनेक्शन पहुंचाने की बात हो. उम्मीद भी थी कि यह सरकार अपने बजट में जनकल्याणकारी योजनाओं पर फोकस करेगी. इसी के तहत श्रम सुधारों की बात भी की गयी है, लेकिन वह अभी स्पष्ट नहीं है. मिडिल क्लास को कोई बड़ा फायदा नहीं दिख रहा है. बहरहाल आम आदमी के लिए यह बजट कुछ उम्मीद जगानेवाला है.
(वसीम अकरम से बातचीत पर आधारित)

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