संस्कृति और परंपराओं में बिहार और झारखंड सहोदर हैं. वैसे तो रिश्ते में हरियाणा भी हमारा सहोदर ही है. अभद्र भाषाओं से परहेज करनेवाले हैं हम. लेकिन किसी ने उकसाया तो हम चुप रहने वाले भी नहीं. हमारी ‘भोजपुरी’ जब चालू होती है तो अच्छे-अच्छे धाकड़ मैदान छोड़ देते हैं. हम तो पहले से ही दलालों से त्रस्त हैं, फिर धनखड़ महोदय अपना नाम शामिल कराने पर क्यों तुले हैं.
लोगों ने आपको देश के सबसे बड़े राजनीतिक मंदिर के लिए चुना है. कलंकित न हो जाये इसकी पवित्रता. ऐसा न हो कि लोग कहें, कमल तो खिला मगर ‘गटर’ में. वोट के बदले बिहारी लड़कियों की शादी जरूर करायें, पुण्य का काम है. लेकिन ख्याल रहे, जाने-अनजाने, काले धन या एफडीआइ के लिए विदेशियों से ऐसी सौदेबाजी न कर बैठें. जुबान फिसलने से रोकें , वरना नाक कट जायेगी.
एमके मिश्र, रातू, रांची
