ठंडा मतलब कोला ही नहीं

गर्मी का मौसम आते ही हम थोड़ी-बहुत राहत की तलाश करने लगते हैं. चिलचिलाती धूप में अगर थोड़ी छांव मिल जाये, तो मानो प्यासे को पानी मिल जाता है और मुसाफिर को मंजिल. गर्मी से निजात पाने के लिए हमारा मन लस्सी, शरबत और गोले खाने को मचल जाता है. पर आज मॉडर्न जमाने के […]

गर्मी का मौसम आते ही हम थोड़ी-बहुत राहत की तलाश करने लगते हैं. चिलचिलाती धूप में अगर थोड़ी छांव मिल जाये, तो मानो प्यासे को पानी मिल जाता है और मुसाफिर को मंजिल. गर्मी से निजात पाने के लिए हमारा मन लस्सी, शरबत और गोले खाने को मचल जाता है. पर आज मॉडर्न जमाने के साथ बदलती जीवन शैली में गर्मी महसूस हुई नहीं कि हम टीवी पर दिखाये जाने वाले महंगे पेय पदार्थो को मुंह लगा बैठते हैं.

हम जानते हैं कि कोला जैसे पेय पदार्थ हानिकारक रसायनों से बनते हैं और इनका बुरा प्रभाव हमारे शरीर पर पड़ता है. वहीं दूसरी ओर लस्सी, शरबत, गóो का रस जैसी पौष्टिक चीजों से हम परहेज करते हैं. कोल्ड ड्रिंक पी कर न सिर्फ हम अपने शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि विदेशी कंपनियों की चांदी और देसी व्यवसाय का आर्थिक नुकसान भी करते हैं.

आनंद कानू, सिलीगुड़ी

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >