अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपयों की गिरावट जारी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिन-प्रतिदिन रुपयों के मूल्य में गिरावट ने देश की अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है. इससे आयातित वस्तुओं के दाम में निरंतर वृद्धि हो रही है. तत्पश्चात कच्चे तेल के मूल्यों में निरंतर वृद्धि ने देश के आम नागरिकों के जीवन की गतिविधियों पर ब्रेक लगा दिया है. अगर हम संपूर्ण […]

अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिन-प्रतिदिन रुपयों के मूल्य में गिरावट ने देश की अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है. इससे आयातित वस्तुओं के दाम में निरंतर वृद्धि हो रही है. तत्पश्चात कच्चे तेल के मूल्यों में निरंतर वृद्धि ने देश के आम नागरिकों के जीवन की गतिविधियों पर ब्रेक लगा दिया है. अगर हम संपूर्ण दोष केंद्र सरकार के ऊपर लगाएं तो यह अतिशयोक्ति होगी.
तेल की बढ़ती महंगाई में एक महत्वपूर्ण योगदान अमेरिका का व्यापार युद्ध जो चीन के साथ निरंतर जारी है, परंतु कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के साथ परमाणु समझौता तोड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में उबाल आ गया है. इन परिस्थितियों में सरकार को तेल से टैक्स कम कर विलासिता जैसी वस्तुओं में वृद्धि करनी होगी, ताकि राजस्व पर दबाव न पड़े.
अभिनव कुमार, लोहियानगर (बेगूसराय)

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