डूबता गरीबों का पैसा

खबर आती रहती है कि चिटफंड कंपनी को सरकार ने बंद कर दिया है. इन कंपनियों में पैसा लगानेवालों का क्या होगा? वे सभी भोले-भाले लोगों को नकली कंपनी के बारे में जानकारी नहीं होती है. और फिर कंपनी पर केस चलता ही जाता है. पर जो पैसा गरीबों ने दिया है वो पैसा वापस […]

खबर आती रहती है कि चिटफंड कंपनी को सरकार ने बंद कर दिया है. इन कंपनियों में पैसा लगानेवालों का क्या होगा? वे सभी भोले-भाले लोगों को नकली कंपनी के बारे में जानकारी नहीं होती है. और फिर कंपनी पर केस चलता ही जाता है. पर जो पैसा गरीबों ने दिया है वो पैसा वापस नहीं मिलता है. सरकार उनको परोक्ष रूप से प्रताड़ित कर रही है.
सरकार ऐसे कामों के लिए सर्टिफिकेट क्यों देती है? यह देख कर लगता नहीं कि सरकार आम जनता की सेवा कर रही है. सरकार को एक क्लीयर गाइडलाइन तैयार करनी चाहिए कि कोई फर्जी कंपनी को पकड़ने के बाद क्या करना चाहिए? इससे आम लोगों के पैसे को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा और उन्हें जल्द लौटाया जा सके.
पालुराम हेंब्रम, सालगझारी

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