जब से बिहार में महागठबंधन टूटा तब से वहां सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति हो रही है. भीषण बाढ़ से प्रभावित जनता की ना तो सरकार और ना ही कोई जनप्रतिनिधि सुध ले रहा है. सरकार के द्वारा की जा रही मदद भी नाकाफी सिद्ध हो रही है. प्रभावित जनता तक राहत सामग्री पहुंच ही नहीं रही है.
मीडिया में भी बर्बादी की सही तस्वीर नहीं आ रही है. विपक्ष रैली कर अपना शक्ति प्रदर्शित करने में जुटा रहा है. इन चीजों से हालात तो नहीं बदलेंगे. पहले ही घास-फूस के घर में रहने वाली जनता बाढ़ से बेघर हो चुकी है. उनकी सुध कौन लेगा? सभी दलों के नेताओं से आग्रह है कि वे अपने वोटरों की सुध लें और बाढ़ से उनका जो नुकसान हुआ है, उन तक राहत सामग्री यथाशीघ्र पहुंचाने में मदद करें.
अनमोल रंजन , रांची.
