आजादी के सत्तर साल

हमारा देश आजादी के 70 साल पूरे कर चुका है. यह अवधि किसी देश और समाज निर्माण के लिए छोटी अवधि नहीं कही जा सकती है. आज जरूरत इस बात की है कि हम सभी आत्ममंथन करें कि विकास और प्रगति की दौड़ में हम कहां खड़े हैं. निश्चित तौर पर विज्ञान, स्वास्थ और अंतरिक्ष […]

हमारा देश आजादी के 70 साल पूरे कर चुका है. यह अवधि किसी देश और समाज निर्माण के लिए छोटी अवधि नहीं कही जा सकती है. आज जरूरत इस बात की है कि हम सभी आत्ममंथन करें कि विकास और प्रगति की दौड़ में हम कहां खड़े हैं. निश्चित तौर पर विज्ञान, स्वास्थ और अंतरिक्ष के क्षेत्र में हमने काफी प्रगति की है.
बहुत कुछ हमने हासिल किया है, लेकिन गरीबी और बेरोजगारी आज भी मुंह बाये खड़ी है. शिक्षा और स्वास्थ के मामले में आम आदमी अपने को बदनसीब पाता है. राजनीति जनता की सेवा के लिए नहीं, बल्कि अकूत संपत्ति कमाने का जरिया बन गयी है. ग्रामीण इलाकों में भूख और बीमारी से गरीब लोग मर रहे हैं. यह चिंता का विषय है.
युगल किशोर, रांची

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