राज्य सरकार की यह कैसी नीति

पारा टीचरों को नियमित करने को लेकर एक ओर जहां राज्य सरकार हाईकोर्ट में यह दलील देती है कि इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार की योजना के तहत हुई है तथा इसके लिए 60% का वित्तीय बोझ केंद्र सरकार वहन करती है. वहीं राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा आयोजित केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा उतीर्ण पारा टीचरों […]

पारा टीचरों को नियमित करने को लेकर एक ओर जहां राज्य सरकार हाईकोर्ट में यह दलील देती है कि इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार की योजना के तहत हुई है तथा इसके लिए 60% का वित्तीय बोझ केंद्र सरकार वहन करती है.

वहीं राज्य सरकार केंद्र सरकार द्वारा आयोजित केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा उतीर्ण पारा टीचरों को टेट पास की मान्यता नहीं देता है. यही कारण है कि सीटेट उतीर्ण पारा टीचरों का मानदेय झारखंड टेट पारा टीचरों के अनुरूप नहीं मिल रहा. कितनी विडंबना है कि राज्य सरकार झारखंड के पारा टीचरों को केंद्र के अधीन मानती है और वहीं उसकी मान्यता को मानने से इंकार करती है. सरकार की यह कैसी नीति है यह समझ से परे है.

निशा, चंद्रपुरा, इमेल से

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