पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की प्रतिमा के पास भागवत गीता उत्कीर्ण किये जाने के बाद उपजा विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है. देश में इन दिनों कोई भी विषय पकड़कर विवाद खड़ा हो जाता है. देश का सामाजिक वातावरण संवेदनशील बन गया है. अगर वह विवाद जाति-धर्म को लेकर है, तो उसे रोकने के बजाए उसे बढ़ाने वाले ही अधिक संख्या में हैं.
उस स्मारक से कलाम के राष्ट्र-सेवा-भाव व कार्य से सीख लेनी चाहिए. ऐसे विवाद खड़ा करना कलाम प्रेमी नागरिकों को कभी पसंद नहीं आयेगा. ‘मिसाइल मैन’ कलाम ने आजीवन शांति के ही मार्ग को स्वीकार किया है. देश के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले इस महान व्यक्ति को किसी भी विवाद से न जोड़ें.
अर्पिता पाठक, इमेल से
