रेलवे में खाने का गिरता स्तर

रेलवे में खाना निर्धारित मापदंडों के अनुकूल नहीं है. शिकायत के लिए दिये गये नंबर पर कोई जवाब नहीं मिलता और कई जगह तो कर्मचारी सांठ-गांठ कर के सूचना ही गायब कर देते हैं. खाने में कंकड़ों का होना, जले हुए तेल का इस्तेमाल तो होता ही रहता है. एक ही तेल में भजिया और […]

रेलवे में खाना निर्धारित मापदंडों के अनुकूल नहीं है. शिकायत के लिए दिये गये नंबर पर कोई जवाब नहीं मिलता और कई जगह तो कर्मचारी सांठ-गांठ कर के सूचना ही गायब कर देते हैं. खाने में कंकड़ों का होना, जले हुए तेल का इस्तेमाल तो होता ही रहता है. एक ही तेल में भजिया और नॉन वेज तले जाते हैं.
कई बार जब अखबारों में रेलवे के खाने में मरी हुई छिपकली, कॉकरोच या गुटके का पाउच आने की खबर पढ़ते हैं, तो कुछ नया नहीं लगता. सरकार व रेलवे को चाहिए कि वो खाने की गुणवत्ता के बारे में ज्यादा ध्यान दे. शिकायतों का तत्काल निवारण हो तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाये.
डॉ शिल्पा जैन सुराणा, वरंगल , इमेल से

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