उम्मीदों पर झाड़ू न फिर जाये!

गत दिनों वाराणसी में अरविंद केजरीवाल की रैली हुई. वहां उन्होंने चुन-चुन कर गुजरात की समस्याओं की चर्चा की. लेकिन यह समझ में नहीं आया कि उन्हें उत्तर प्रदेश में गुजरात की चर्चा करने की क्या जरूरत पड़ गयी. गुजरात के स्कूलों में शिक्षक हैं या नहीं, इससे वाराणसी के लोगों को क्या मतलब? लोकसभा […]

गत दिनों वाराणसी में अरविंद केजरीवाल की रैली हुई. वहां उन्होंने चुन-चुन कर गुजरात की समस्याओं की चर्चा की. लेकिन यह समझ में नहीं आया कि उन्हें उत्तर प्रदेश में गुजरात की चर्चा करने की क्या जरूरत पड़ गयी.

गुजरात के स्कूलों में शिक्षक हैं या नहीं, इससे वाराणसी के लोगों को क्या मतलब? लोकसभा चुनाव के लिए तैयार भाषणों में पूरे देश की समस्याओं को अधिक महत्व मिलना चाहिए और यह बात सभी दलों को समझनी चाहिए. बेहतर होता अगर केजरीवाल ने अपने 49 दिनों के कार्यकाल का हिसाब दिया होता. वे समस्याओं का समाधान कैसे करेंगे, इस पर अपनी पार्टी की नीतियां स्पष्ट की होतीं. इस नयी पार्टी का उदय लोगों के लिए आशा की किरण के रूप में हुआ है, उम्मीदों पर झाड़ू न फिरे. केजरीवाल स्पष्ट करें कि उनकी लड़ाई भ्रष्टाचार के खिलाफ है या मोदी के खिलाफ.

आनंद मिश्र, ई-मेल से

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