राजनीतिक पार्टियों का अस्तित्व केवल लोकतंत्र में ही संभव है. मगर भीतरी पार्टी लोकतंत्र बिरले ही देखने को मिलता है. भारत में तो हाईकमान संस्कृति हावी है. ह्विप जारी कर आदेश पालन करने को कहा जाता है. ऐसा नहीं करने पर नेताओं पर शख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है.
यह सच्चा लोकतंत्र नहीं है. असली लोकतंत्र देखना हो, तो अमेरिका का उदहारण लिया जा सकता है. वहां के उच्च सदन यानी सीनेट में ‘ओबामा केयर’ नमक मेडिकल बिल को समाप्त करने के लिए मतदान कराया गया. 100 सदस्यों वाले सीनेट में 52 सदस्य रिपब्लिकन पार्टी के हैं, फिर भी यह विधेयक पास नहीं हुआ. जबकि पिछले मई में निचली सदन ने इसे अपनी मंजूरी दे दी थी. लोकतंत्र हो तो अमेरिका जैसा.
जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी
