सेंसर बोर्ड का राजनीतिक अंदाज

यह दुखद है कि सुमन घोष द्वारा निर्देशित वृत चित्र ‘एक तार्किक भारतीय’ को सेंसर बोर्ड ने रोक दिया है. प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं नोबेल पुरस्कार से सम्मानित डॉ अमर्त्य सेन की जीवन पर बने इस वृतचित्र को केवल राजनीतिक वजहों से बोर्ड ने कैंची चलाने का फैसला लिया है. यह एक लोकतांत्रिक देश की खतरनाक […]

यह दुखद है कि सुमन घोष द्वारा निर्देशित वृत चित्र ‘एक तार्किक भारतीय’ को सेंसर बोर्ड ने रोक दिया है. प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं नोबेल पुरस्कार से सम्मानित डॉ अमर्त्य सेन की जीवन पर बने इस वृतचित्र को केवल राजनीतिक वजहों से बोर्ड ने कैंची चलाने का फैसला लिया है. यह एक लोकतांत्रिक देश की खतरनाक प्रवृत्ति को दर्शाता है.
सेंसर बोर्ड का तर्क समझ से परे है कि उसे ‘गाय’, ‘गुजरात’, ‘हिंदू’ तथा ‘हिंदुत्व’ शब्द से आपत्ति क्यों होने लगा? बोर्ड की दलील है कि इन शब्दों के प्रयोग से देश की छवि खराब होती है. सरकार क्यों ये नहीं कहती कि अमर्त्य सेन सरकार की नीतियों का तार्किक ढंग से आलोचना करते हैं, इसलिए वे सरकार के दुश्मन है. और उनका महिमामंडन करने वाले किसी भी फिल्म को प्रदर्शित नहीं होने दिया जाएगा.
जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी

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