तो क्या ऐसा होगा हमारा भविष्य?

कुछ ही समय पहले सोशल मीडिया पर लीक हुआ एक वीडियो देश के आने वाले दिनों की एक गलत तसवीर पेश करता हुआ नजर आ रहा है. इस वीडियो में अंगरेजी स्कूल के छठी-सातवीं कक्षा के बच्चे आपस में गाली-गलौज करते नजर आ रहे हैं. आज यह अभिभावक और स्कूल के शिक्षकों के लिए एक […]

कुछ ही समय पहले सोशल मीडिया पर लीक हुआ एक वीडियो देश के आने वाले दिनों की एक गलत तसवीर पेश करता हुआ नजर आ रहा है. इस वीडियो में अंगरेजी स्कूल के छठी-सातवीं कक्षा के बच्चे आपस में गाली-गलौज करते नजर आ रहे हैं. आज यह अभिभावक और स्कूल के शिक्षकों के लिए एक चिंता का विषय है. आखिर इतने महंगे-महंगे विद्यालयों में पढ.नेवाले बच्चे शिक्षा के नाम पर क्या यही सीख रहे हैं?

अगर मौजूदा समय में चल रही चुनावी बातों को छोड. दें, तो यह हम सभी के लिए एक अहम मुद्दा है. आखिर हमारी आने वाली पीढी क्या सीख रही है, यह एक अहम प्रश्न है. जिस सभ्य समाज में हम रहते हैं, उसमें शायद इन चीजों का स्थान नहीं है. हमारे पूर्वजों ने जो हमें सिखाया है, वे चीजें तो आज के बच्चों में तनिक मात्र भी नहीं दिखतीं. हमें लगता है कि हाइ-प्रोफाइल स्कूलों में दाखिला करा देने से सारी चिंता से मुक्त हो जायेंगे, लेकिन जरूरत इस बात की है कि अभिभावक खुद समय निकाल कर बच्चों पर ध्यान दें, उनसे घुलें-मिलें. ताकि उन्हें भी उनसे अपनापन लगे और जिंदगी जीने के अच्छे तरीके सीखने के लिए जरूरी प्रोत्साहन मिले.

जैसे-जैसे समय बीतता जाता है और हमारे बच्चे बड.े होते जाते हैं, उनकी बोली वैसी ही हो जाती है जैसा वे समाज में देखते सुनते हैं. टीवी चैनलों से बच्चों का अत्यधिक लगाव होता है और टीवी पर आजकल गाली-गलौज का प्रयोग रियलिटी शो वगैरह में आम हो गया है. लेकिन आखिर में प्रश्न यही उठता है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है? बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है लेकिन फिलहाल जिस तरह का माहौल है, वह शायद बच्चों के भविष्य को अंधकार में ले जा रहा है.

कोणार्क रतन, ई-मेल से

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