लोकतंत्र में जनता को अपनी सरकार या शासक चुनने का अधिकार प्राप्त होता है और इसी से शासक वर्ग और जनता के बीच सर्वदा एक संवाद स्थापित रहता है. चेक एंड बैलेंस की स्थिति बनी रहती है. भारत में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जहां जनता की मरजी से सरकार बनती है और हर नागरिक को समान वोटिंग अधिकार प्राप्त है.
आज हम फिर एक चुनाव के सम्मुख खड़े हैं पर यह चुनाव कई मायने में अलग लग रहा है क्योंकि पिछले दशक की सरकार की शिथिलता और कई मोरचों पर नाकामी और उसके साथ भ्रष्टाचार की नयी ऊचाइयां हमें सतर्क होकर मतदान करने के लिए सीख देती हैं. मतदान को आज तक कई वर्गों में एक जातिगत, भाषागत, क्षेत्रगत या संकीर्ण स्वार्थगत माध्यम माना गया है जिससे किसी संकीर्ण भावना में बह कर प्रयोग किया जाता रहा है. लेकिन ऐसी स्थिति से हमें बचना चाहिए.
लोकतंत्र सिर्फ सुनने के लिए और किताबों में लिखने के लिए अच्छा रह जायेगा अगर जनता सतर्क और व्यापक दृष्टिकोण लिए मतदान न करे. आज हम तकनीकी, कृषि, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल, सुरक्षा, शिक्षा आदि सभी क्षेत्रों में काफी आगे बढ़े हैं पर भारत में मौजूद संसाधन और मानव बल के अनुसार हमें और भी अग्रसर होना चाहिए था. विडंबना है कि आज भी यहां भुखमरी, अशिक्षा, कुपोषण, दंगे आदि समस्याएं सिर उठा कर पनप रही हैं.
मतदाताओं की यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसी सरकार चुनें जो हमारी मूलभूत समस्याओं जैसे भ्रष्टाचार, असुरक्षा, कुपोषण, अशिक्षा, आतंकवाद, माओवाद, सांप्रदायिकता, सीमा विवाद आदि पर ठोस कदम उठा सके. किसी संकीर्ण मनोदशा या स्वार्थ या झुकाव के बल पर वशीभूत न होकर राष्ट्र कल्याण में मतदान करें.
।। मनोज आजिज ।।
आदित्यपुर, जमशेदपुर
