हमारे देश की जनता कितनी समझदार है, इस बात का सही अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि चुनाव के समय तो ये लोग अपना बेशकीमती वोट बेच देते हैं. कभी शराब, कभी टीवी, कभी साड़ी, तो कभी लैपटॉप के लिए. यही नहीं, वोट देने से पहले वे बजाय यह देखने के कि कौन-सा उम्मीदवार कर्मठ और साफ छवि का है, वे यह देखते हैं कि कौन-सा उम्मीदवार उनकी जाति, उनके क्षेत्र का है.
अगर समाज के अशिक्षित लोग ही ऐसा करें तो समझ में भी आता है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इसी आंधी दौड़ में पढ़े-लिखे लोग भी शामिल हो जाते हैं. बाद में यही लोग कहते फिरते हैं कि महंगाई बढ़ गयी, नेता यह नहीं करते, नेता वह नहीं करते. ऐसे लोगों को अपने चुने हुए नेता पर ऐसे आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं है. अब समय है जागने का, जागो जनता जागो.
।। राकेश कुमार गिरि ।।
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