आरोपपत्र में एक पीड़िता के बयान के हवाले से दावा किया गया है कि उसे पाकिस्तानी धर्मगुरु तारिक जमील और विवादित भारतीय इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के वीडियो देखने के लिए मजबूर किया गया था, ताकि वह इस्लाम के बारे में जान सके. पीड़िता का बयान टीसीएस मामले में पुलिस द्वारा पिछले हफ्ते नासिक की एक अदालत में दाखिल आरोपपत्र का हिस्सा है. बयान में पीड़िता ने बताया कि आरोपियों ने किस तरह सोची-समझी साजिश के तहत ‘मानसिक तनाव’ कम करने के बहाने उसे मनोवैज्ञानिक रूप से बर्गलाने और धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने की साजिश रची. पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसे “यकीन दिलाने की कोशिश की गई” कि अगर वह इस्लाम कबूल कर लेगी, तो उसका तनाव कम हो जाएगा और वह धीरे-धीरे “इन बातों” पर विश्वास करने लगी थी.
यह आरोपपत्र देओलाली कैंप पुलिस थाने में आईटी कंपनी की 23 वर्षीय कर्मचारी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दायर मामले से संबंधित है. आरोपपत्र में तीन गिरफ्तार आरोपियों (दानिश शेख, तौसीफ अत्तार और निदा खान) के अलावा छत्रपति संभाजीनगर से एआईएमआईएम पार्षद मतीन पटेल को भी आरोपी के रूप में नामजद किया गया है, जिन पर निदा खान के फरार होने के दौरान उसे शरण देने का आरोप है.
आरोपपत्र के मुताबिक, पटेल ने खान को शरण दी थी, ताकि वह गिरफ्तारी से बच सके. इसमें कहा गया है कि पटेल ने यह बात जानते हुए भी ऐसा किया कि खान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है. आरोपपत्र में कहा गया है कि खान की गिरफ्तारी से पहले जब पुलिस ने पटेल से उसके (खान) ठिकाने के बारे में पूछे तो उसने (पटेल) बार-बार कहा कि इम्तियाज जलील साहब (एआईएमआईएम के पूर्व लोकसभा सदस्य) को पूछना पड़ेगा. हालांकि, इसमें कहा गया है कि सख्ती से पूछताछ किए जाने पर पटेल ने पुलिस को उस जगह के बारे में बताया, जहां उसने खान, उसकी मां, पिता, भाई और चाची को शरण दी थी.
भगवान के भजन सुनना और मंदिर जाना बंद करो
आरोपपत्र के अनुसार, पीड़िता ने पुलिस के समक्ष दर्ज बयान में बताया कि तीनों आरोपियों ने कैसे उसके तनाव में होने का फायदा उठाकर सुनियोजित रूप से उसे मनोवैज्ञानिक और धार्मिक रूप से बर्गलाने की कोशिश की. बयान के मुताबिक, पहले से शादीशुदा दानिश शेख ने पीड़िता को शादी का झांसा देकर उसका यौन उत्पीड़न किया. इसमें कहा गया है कि जब पीड़िता को अपने भविष्य और परिवार की स्वीकृति को लेकर चिंता हुई, तो दानिश ने कहा कि डरो मत, मुझ पर भरोसा रखो, अल्लाह हमारे साथ है. भगवान के भजन सुनना और मंदिर जाना बंद करो. तुम्हारा तनाव कम हो जाएगा.
पाकिस्तानी इस्लामी धर्मगुरु के भाषण सुनने के लिए कहा
बयान के अनुसार, दानिश ने पीड़िता से तस्बीह जपने के लिए कहा. पीड़िता के मुताबिक, दानिश ने उससे कहा कि तुम अल्लाह का नाम जितना ज्यादा लोगी, तुम्हारे गुनाह उतने कम जो जाएंगे और तुम्हारे नेक काम बढ़ जाएंगे, तुम चाहो तो अस्तगफार पढ़ो, यानी अल्लाह से माफी मांगो और तुम्हारा मानसिक तनाव कम हो जाएगा. आरोपपत्र के अनुसार, पीड़िता ने पुलिस को बताया कि दानिश ने उससे पाकिस्तानी इस्लामी धर्मगुरु, उपदेशक और तबलीगी जमात के सदस्य तारिक जमील का वीडियो देखने और उनके भाषण सुनने के लिए कहा.
पीड़िता ने बताया कि दानिश ने उसके बैंक खातों और यूपीआई पिन के बारे में पूरी जानकारी ले ली थी और उसे (दानिश) उसके (पीड़िता) बैंक में मौजूद राशि के बारे में भी पता था. पीड़िता के मुताबिक, दानिश ने तौसीफ और निदा से मुझे इस्लाम के बारे में जानकारी देने के लिए कहा था. इसलिए, तौसीफ और निदा समय-समय पर मुझे इस्लाम के बारे में बताया करते थे. तौसीफ ने मुझे यूट्यूब पर जाकिर नाइक और डॉ. इसरार अहमद (पाकिस्तानी धर्मगुरु) के वीडियो देखने के लिए कहा था. मैंने उनके निर्देशानुसार ऐसा किया.
मैं इस्लाम धर्म अपना लूंगी तो…
आरोपपत्र के अनुसार, पीड़िता को इस्लामी धर्मशास्त्र के बारे में बताया गया, जिसमें इब्राहिम की कहानियां, बकरीद, जमजम का पानी, कुर्बानी और जन्नत और जहन्नुम की अवधारणाएं शामिल हैं. पीड़िता ने कहा कि मुझे यकीन दिलाने की कोशिश की गई कि अगर मैं इस्लाम धर्म अपना लूंगी, तो मेरा मानसिक तनाव कम हो जाएगा. धीरे-धीरे मैंने इन बातों पर विश्वास करना शुरू कर दिया. आरोपपत्र में शिकायतकर्ता, उसकी मां, टीसीएस के कर्मचारियों/प्रबंधन, यौन उत्पीड़न निवारण (पीओएसएच) समिति के सदस्यों और मामले के जांच अधिकारियों सहित 106 गवाहों के बयान शामिल हैं.
मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया गया
महाराष्ट्र सरकार ने टीसीएस के नासिक कार्यालय में काम करने वाली कई महिला कर्मचारियों की ओर से यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण के प्रयास की शिकायत किए जाने के बाद मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था. टीसीएस ने स्पष्ट किया था कि उसकी किसी भी तरह के उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति है और नासिक कार्यालय में कथित यौन उत्पीड़न में शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है.
