मणिपुर वीडियो मामला: अमित शाह को क्यों आया गुस्सा, बोले- एन बीरेन सिंह को इसलिए नहीं किया बर्खास्त

अमित शाह ने कहा कि संसद सत्र के एक दिन पहले ही ये वीडियो क्यों आया और जिस किसी के पास भी यह वीडियो था उसे यह पुलिस को, पुलिस महानिदेशक को दे देना चाहिए था. उन्होंने कहा कि समय पर यह वीडियो पुलिस को दिया जाता तो 5 मई को ही कार्रवाई हो जाती.

लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में दो महिलाओं की निर्वस्त्र परेड से संबंधित वीडियो मामले पर बयान दिया. उन्होंने कहा, यह घटना 4 मई की है और बेहद शर्मनाक है. उन्होंने कहा कि कोई भी सभ्य समाज इसे स्वीकार नहीं कर सकता.

शाह ने वीडियो के समय को लेकर पूछा सवाल

अमित शाह ने कहा कि संसद सत्र के एक दिन पहले ही ये वीडियो क्यों आया और जिस किसी के पास भी यह वीडियो था उसे यह पुलिस को, पुलिस महानिदेशक को दे देना चाहिए था. उन्होंने कहा कि समय पर यह वीडियो पुलिस को दिया जाता तो 5 मई को ही कार्रवाई हो जाती. शाह ने कहा कि वीडियो के सामने आने के तत्काल बाद चेहरों की पहचान करके सरकार ने इस मामले में कार्रवाई की है और नौ लोगों को गिरफ्तार किया जिन पर मुकदमा चल रहा है.

अमित शाह ने मणिपुर मामले में विपक्ष पर राजनीति करने लगाया आरोप

मणिपुर मामले में विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी मणिपुर दौरे के दौरान सड़क मार्ग से जाने की जिद पर अड़े रहे जबकि वह शांति से हवाई मार्ग से जा सकते थे. उन्होंने कहा, ऐसा समय राजनीति करने का नहीं होता है यह बात विपक्ष को समझनी चाहिए. उन्हें समझना चाहिए कि जनता सबकुछ जानती और समझती है. गृह मंत्री ने कहा कि वह पहले दिन से मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार थे लेकिन विपक्ष चर्चा नहीं चाहता था और केवल विरोध करना चाहता था.

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मणिपुर के मुख्यमंत्री को क्यों बर्खास्त नहीं किया गया, शाह ने दिया जवाब

मणिपुर में अनुच्छेद 356 लगाने की विपक्ष की मांग पर अमित शाह ने कहा कि मणिपुर की राज्य सरकार सहयोग कर रही है, इसलिए ऐसा नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 356 तब लागू किया जाता है जब राज्य सरकार सहयोग नहीं करती. शाह ने विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए कहा कि इसलिए मणिपुर के मुख्यमंत्री को भी बदलने की जरूरत नहीं थी. उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष उनकी बात से असंतुष्ट होता, तो प्रधाानमंत्री से बोलने की मांग की जा सकती थी.

अमित शाह को आया गुस्सा

अमित शाह ने कहा कि विपक्ष नहीं चाहता कि वह बोलें लेकिन वे उन्हें चुप नहीं करा सकते, 130 करोड़ लोगों ने इस सरकार को चुना है इसलिए उन्हें बात सुननी होगी. उन्होंने कहा कि वह स्वयं तीन दिन मणिपुर में रहे और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय लगातार 23 दिन तक उस राज्य में रहे.

मणिपुर में हिंसा का इतिहास रहा

अमित शाह ने कहा कि इससे पहले मणिपुर में हिंसा का इतिहास रहा है और कांग्रेस की सरकारों के समय भी वहां नस्लीय हिंसा की घटनाएं होती रहीं, लेकिन कभी कोई गृह मंत्री राज्य में नहीं गया और उनके समय भी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने संसद में इस मामले पर उत्तर नहीं दिया. उन्होंने कहा कि सरकार मणिपुर में कुकी मैतेई दोनों समुदायों से बातचीत कर रही है. शाह ने कहा, मेरा मणिपुर की जनता से करबद्ध निवेदन है कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है. वार्ता कीजिए.

मणिपुर के वीडियो के समय पर सवाल करके गृह मंत्री ने अपनी अक्षमता स्वीकार की: कांग्रेस

कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मणिपुर से संबंधित वीभत्स वीडियो के समय को लेकर सवाल खड़ा किया जाना शर्मनाक है और वह ऐसा करके अपनी अक्षमता को स्वीकार कर रहे हैं. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ (ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, यह बिलकुल शर्मनाक है कि गृह मंत्री मणिपुर का भयावह वीडियो सामने आने के समय पर सवाल उठा रहे हैं. सदन में यह दावा करके कि खुफिया एजेंसियों को ऐसे किसी वीडियो के बारे में जानकारी नहीं थी, वह भारत के गृह मंत्री के रूप में सिर्फ अपनी अक्षमता को स्वीकार कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया, वह अनजाने में ही सही, मणिपुर के मुख्यमंत्री की अयोग्यता को भी स्वीकार कर रहे हैं.

अमित शाह बोले- हाईकोर्ट के फैसले ने आग में घी डालने का काम किया

लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर से जुड़े घटनाक्रम का ब्यौरा दिया और सरकार द्वारा वहां शांति स्थापित करने की दिशा में उठाये गए कदमों की जानकारी दी. गृह मंत्री ने मणिपुर में सभी पक्षों से हिंसा छोड़ने की अपील की और कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है. शाह ने कहा, वे विपक्ष की इस बात से सहमत हैं कि मणिपुर में हिंसा का तांडव हुआ, हिंसक घटनाएं हुईं. वहां जो कुछ भी हुआ, वह शर्मनाक है. उस पर राजनीति करना उससे भी ज्यादा शर्मनाक है. उन्होंने कहा कि वहां जो दंगे हुए वे परिस्थितिजन्य थे और इस पर राजनीति करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि जनता को पता चलना चाहिए कि मणिपुर में अतीत में भी किस तरह से नस्लीय हिंसा होती रही है.

सरकार की मंशा जनसांख्यिकी बदलने की कतई नहीं

अमित शाह ने कहा कि सरकार की मंशा वहां जनसांख्यिकी को बदलने की कतई नहीं है, इस विषय पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इन घटनाओं में किसी की जान गई है, तो किसी का सम्मान गया है. गृह मंत्री ने कहा, कोई कितना भी दूर क्यों न हो, वह है तो भारत का नागरिक ही. इधर के और उधर के सभी लोगों को वहां शांति की अपील में साथ आना चाहिए. उन्होंने कहा, यह भ्रांति देश की जनता के सामने फैलाई गई है कि सरकार चर्चा के लिए तैयार नहीं है. मैं यह साफ करना चाहता हूं कि सत्र आहूत होने से पहले मैंने पत्र लिखकर मणिपुर पर चर्चा के लिए कहा था. शाह ने कहा कि मणिपुर में छह साल पहले भाजपा की सरकार बनी थी और तब से गत तीन मई तक वहां एक दिन भी हिंसा नहीं हुई, कर्फ्यू नहीं लगा, बंद नहीं हुआ और उग्रवादी घटनाएं भी कम हुईं.

म्यांमा से आये कुकी आदिवासी

मणिपुर के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि 2021 में म्यांमा में सैन्य शासन आया और इसके बाद वहां कुकी समुदाय पर शिकंजा कसा जाने लगा. फिर वहां से भारी संख्या में कुकी आदिवासी मिजोरम और मणिपुर में आने लगे और वे जंगलों में बसने लगे. उन्होंने कहा कि इसके बाद मणिपुर के बाकी हिस्सों में असुरक्षा की भावना ने जन्म ले लिया. इसके बाद स्थिति को समझते हुए सरकार ने सीमा को बंद करने की दिशा में काम किया. शाह ने कहा कि इस बीच ऐसी अफवाह फैल गई कि 53 बसावटों को अस्थायी जंगल गांव घोषित किया गया है जिससे पहले से व्याप्त असुरक्षा की भावना और बढ़ गई. उन्होंने कहा, इसमें घी डालने का काम किया उच्च न्यायालय के एक फैसले ने. इसमें कहा गया कि मैतेई को आदिवासी घोषित कर दिया जाए. उन्होंने कहा कि इसके बाद मणिपुर में हिंसक घटनाओं में अब तक 152 लोग मारे गए हैं. इन घटनाओं को लेकर 1106 प्राथमिकी दर्ज की गयी हैं और लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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