Parliament Security Breach: मां को भी नहीं थी जानकारी नीलम वर्मा दिल्ली में करने वाली है ऐसा काम

Parliament Security Breach: सुरक्षा में चूक एक दिन बाद यानी आज संसद भवन के अंदर और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े कदम उठाए गए. पुलिस तथा संसद सुरक्षा कर्मचारियों ने परिसर में प्रवेश करने वालों की गहन जांच की. इस बीच आइए आपको बताते हैं नीलम वर्मा के बारे में जिसे मामले में गिरफ्तार किया गया है.

Parliament Security Breach: संसद पर आतंकी हमले की बरसी के दिन बुधवार को सुरक्षा में सेंधमारी की बड़ी घटना सामने आई जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है. जानकारी के अनुसार, लोकसभा की कार्यवाही के दौरान दर्शक दीर्घा से दो लोग सदन के भीतर कूद गए, नारेबाजी की और ‘केन’ के जरिये पीले रंग का धुआं फैला दिया. इसके बाद संसद भवन की सुरक्षा गुरुवार को और चौकस कर दी गई. संसद के गेट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम आज किये गये. जूते और टोपी निकलवाकर तलाशी ली गई. इस बीच संसद की सुरक्षा में चूक को लेकर लोकसभा सचिवालय ने आठ कर्मचारियों को निलंबित किया है. आपको बता दें कि संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन करने वाले गिरफ्तार लोगों में से एक, नीलम वर्मा है जो 37 साल की है. विभिन्न आंदोलनों में नीलम की भागीदारी देखी जा चुकी है. लंबे समय से बांगर क्षेत्र में एक क्रांतिकारी के रूप में उन्होंने अपनी पहचान बनाई है. इस संबंध में अंग्रेजी वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया ने खबर प्रकाशित की है.

अपने माता-पिता की सबसे बड़ी संतान है नीलम वर्मा

नीलम वर्मा को लेकर जो खबर प्रकाशित की गई है उसमें कहा गया है कि, वह अपने माता-पिता की सबसे बड़ी संतान है. जब केंद्र सरकार तीन कृषि कानून लेकर आई थी, उस वक्त भी इन कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन में वह सक्रिय नजर आई थी. उसने 26 नवंबर, 2020 और उसके बाद हरियाणा में प्रवेश करने पर उचाना कलां शहर में पंजाब के किसानों का स्वागत भी किया था. इस साल 28 मई को एक बीजेपी सांसद द्वारा यौन उत्पीड़न के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पहलवानों का समर्थन करने भी वह पहुंची थी. उन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में भी लिया था. नीलम वर्मा के माता-पिता से बातचीत के आधार पर खबर प्रकाशित की गई है. आरोपी के माता-पिता ने कहा कि मेरी बेटी 2015 में अपने कमरे की सीढ़ियां चढ़ते समय दूसरी मंजिल से पहली मंजिल पर गिर गई, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं. इसके बाद, वह हमारे घर में अपनी खाट पर तीन साल तक बिस्तर पर पड़ी रही, जिससे उसके सपने पूरी तरह से चकनाचूर हो गए.

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चोट लगने के बाद शादी से किया इनकार

आगे नीलम के माता-पिता ने कहा कि चोट लगने के बाद उसने शादी से भी इनकार कर दिया था. आमतौर पर वह अपनी कमर पर बेल्ट पहनकर रहती थी. हालांकि, उन्होंने मनरेगा योजना के तहत काम करने वाले दलित लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने का फैसला किया. उन्होंने मनरेगा योजना के घोटाले का पर्दाफाश किया क्योंकि जो लोग इस योजना के तहत काम पाने के हकदार नहीं थे, वे बिना कोई काम किए लाभ ले रहे थे. इसके बाद, नीलम ने अधिकारियों से संपर्क किया और उनसे मुलाकात की और क्षेत्र के वास्तविक लाभार्थियों के लिए काम सुनिश्चित कराया.

दिल्ली योजना का खुलासा नहीं किया नीलम ने

उसकी मां सरस्वती देवी जो 57 साल की हैं, उन्होंने भरे दिल से कहा कि नीलम ने गांव के युवाओं से बातचीत की और दो साल पहले शहर में रहने वाले एक ग्रामीण के खाली घर में उनके लिए एक पुस्तकालय खोलने का काम किया, लेकिन मनरेगा घोटाले का पर्दाफाश करने के बाद उन्हें पुस्तकालय खाली करना पड़ा. पुस्तकालय को बगल के गांव में शिफ्ट कर दिया गया. जब से उसने अपने पैरों पर चलना शुरू किया है तब से वह सभी बाधाओं और व्यवस्था से संघर्ष करने में लग गई. उन्होंने आगे कहा कि मैंने बुधवार को उससे बात की लेकिन उन्होंने अपनी दिल्ली योजना का खुलासा नहीं किया.

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मर जाना ही बेहतर…

नीलम की मां ने आगे कहा कि जब हमने देखा कि लोग उससे दुश्मनी बढ़ाने लगे हैं, तो हमने उसे पांच महीने पहले आगे की पढ़ाई के लिए हिसार जिले में भेज दिया, जहां वह एक पेइंग गेस्ट (पीजी) में रह रही थी. हमें उसके कदम और बुधवार को उठाए गए कदम के बारे में जानकारी नहीं थी. उन्होंने आगे कहा कि नीलम इस साल अपनी एचटीईटी परीक्षा (हरियाणा में शिक्षण पद के लिए आवेदन करने के लिए योग्यता परीक्षा) समाप्त होने के बाद से रोजगार को लेकर चिंतित थी. वह कहती थी कि वह बहुत योग्य थी लेकिन उसे नौकरी नहीं मिल रही थी, इसलिए मर जाना ही बेहतर है.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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