Watch Video: 10-10 रुपये जोड़कर बेटी के लिए खरीदी स्कूटी, जानें गुमटी चलाने वाले बजरंग राम की कहानी

Watch Video: छत्तीसगढ़ के जशपुर से एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है. गुमटी चलाने वाले एक पिता ने अपनी बेटी की इच्छा पूरा करने के लिए जो किया आज मिशाल बन गया है. हर ओर उनकी तारीफ हो रही है. आइये आपको बताते हैं गुमटी संचालक बजरंग राम के संघर्ष की कहानी.

Watch Video: छत्तीसगढ़ जशपुर के रहने वाले बजरंग राम भगत गुमटी चलाते हैं और उपने परिवार को पालते हैं. अपने रोजाना की कमाई से उन्होंने 10-10 रुपये बचाकर अपनी बेटी को इस दिवाली एक स्कूटी गिफ्ट किया. गाड़ी पाकर बच्ची के चेहरे की खुशी बढ़ गई है. उसे अब पढ़ाई करने के लिए पैदल चलने की जरूरत नहीं होगी.

पिता बजरंग राम भगत ने क्या बताया?

पिता बजरंग राम भगत बताते हैं, “मैं अपनी बच्ची की खुशी के लिए स्कूटी खरीदने के अपने सपने को पूरा करने के लिए हर दिन जो भी संभव हो, 10 रुपये या 100 रुपये, जो भी मेरे पास होता था, बचाता था. मैंने दिवाली पर 40,000 रुपये के सिक्कों से एक स्कूटी खरीदा और बाकी नकद था. मैं कभी भी ऋण नहीं लेना चाहता था.”

स्कूटी पाकर भावुक हुई बेटी चंपा

स्कूटी पाकर बेटी चंपा भावुक हो गई. उसने कहा- “मुझे बहुत खुशी है कि मेरे पिता कम से कम रोजाना बचत करते थे और आभारी हूं कि उन्होंने मुझे एक स्कूटी खरीद कर दी. अब मेरे लिए एक जगह से दूसरी जगह जाना आसान हो जाएगा.”

शोरूम के मालिक आनंद गुप्ता ने क्या बताया?

शोरूम के मालिक आनंद गुप्ता ने बताया, “दिवाली पर बजरंग राम ने सिक्कों से स्कूटी खरीदने की इच्छा जताई और हम यह जानकर हैरान रह गए. मैंने तुरंत अपने कर्मचारियों से सिक्के गिनने को कहा. यह हम सभी के लिए एक सुनहरा पल था. यह ईमानदारी की उपलब्धि थी जो उनकी बचत में झलक रही थी… उन्हें स्क्रैच कार्ड ऑफर में एक मिक्सर ग्राइंडर भी मिला. उन्होंने 40,000 रुपये के सिक्कों से और बाकी नकद भुगतान किया. वह इससे बहुत खुश थे और हम भी.”

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लेखक के बारे में

Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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