VP: आपातकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लोकतंत्र को पहुंची गहरी चोट

उपराष्ट्रपति ने आपातकाल के दौरान न्यायपालिका की भूमिका सवाल उठाते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान देश के 9 हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि नागरिकों के मौलिक अधिकार आपातकाल में भी सुरक्षित रहते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन फैसलों को पलट दिया और कार्यपालिका को असीमित ताकत दे दी. यह भारत के न्यायिक इतिहास का सबसे काला निर्णय था, जिसने तानाशाही को वैध बना दिया.

VP: देश में 25 जून 1975 को लगे आपातकाल लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला अध्याय था. सुप्रीम कोर्ट के उस दौरान दिए गए फैसले से न्यायपालिका की गरिमा को गहरी ठेस पहुंची और तानाशाही को वैधता प्रदान करने का काम किया. ऐसे में 25 जून को संविधान हत्या दिवस के रूप में मनाना सिर्फ स्मृति नहीं बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए चेतावनी है. देश की आजादी के 28वें साल में केवल एक व्यक्ति यानी तत्कालीन प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने आपातकाल की घोषणा कर दी. जबकि संविधान स्पष्ट कहता है कि राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की सामूहिक सलाह पर काम करना चाहिए. यह बात शुक्रवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राज्यसभा इंटर्न को संबोधित करते हुए कहा.

उन्होंने कहा कि आपातकाल की घोषणा होते ही एक लाख से अधिक नागरिकों को जेल में बंद कर दिया गया. मीडिया पर पाबंदी लगा दी गयी और सभी संस्थाओं को पंगु बना दिया गया. आपातकाल के दौरान देश के प्रमुख विपक्षी नेताओं जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, मोरारजी देसाई, चंद्रशेखर, कई मुख्यमंत्रियों, राज्यपाल और वैज्ञानिक तक को गिरफ्तार कर लिया गया. आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर रोक लगा दी गयी. 


आपातकाल के बारे में युवाओं को जागरूक करना जरूरी


उपराष्ट्रपति ने न्यायपालिका की भूमिका पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, आपातकाल के दौरान देश के 9 हाईकोर्ट ने फैसला दिया था कि नागरिकों के मौलिक अधिकार आपातकाल में भी सुरक्षित रहते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन फैसलों को पलट दिया और कार्यपालिका को असीमित ताकत दे दी. यह भारत के न्यायिक इतिहास का सबसे काला निर्णय था, जिसने तानाशाही को वैध बना दिया. मौजूदा सरकार ने इस ऐतिहासिक भूल को जनमानस में जीवित रखने के लिए 11 जुलाई 2024 को एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के तौर पर मनाने का फैसला लिया. यह हमें याद दिलाएगा कि आम नागरिक ही संविधान और लोकतंत्र का रक्षक है. सभी को लोकतंत्र के मूल्य को याद रखना चाहिए. भारत सद्भावना में विश्वास करता है.

देश में हर नागरिक को अपने हिसाब से धर्म पालन का अधिकार है. लेकिन प्रलोभन और लालच देकर धर्म परिवर्तन कराना समाज के लिए खतरा है.उपराष्ट्रपति ने कहा कि शनिवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है. यह भारत की अमूल्य धरोहर है. योग मन और शरीर को स्वस्थ बनाने का सबसे बड़ा साधन है और इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाने की जरूरत है. इस दौरान राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी, अतिरिक्त सचिव डॉक्टर केएस सोमशेखर सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >