एक्टर और डीएमडीके पार्टी के चीफ विजयकांत का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक

एक्टर और डीएमडीके पार्टी के चीफ विजयकांत का गुरुवार को निधन हो गया. वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे. अस्पताल की ओर से एक बयान जारी किया गया है जिसमें यह जानकारी दी गई है.

अभिनेता-राजनेता और देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कषगम (डीएमडीके) प्रमुख कैप्टन विजयकांत का गुरुवार को निधन हो गया. जानकारी के अनुसार, डीएमडीके के संस्थापक और गुजरे जमाने के लोकप्रिय तमिल अभिनेता विजयकांत का चेन्नई के एक अस्पताल में निधन हो गया. ‘मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स एंड ट्रॉमेटोलॉजी (एमआईओटी) इंटरनेशनल’ की ओर से एक बयान जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि विजयकांत को निमोनिया के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. इसके बाद से वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे. डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद 28 दिसंबर 2023 की सुबह उनका निधन हो गया.

न्यूज एजेंसी एएनआई ने जो खबर दी है कि अभिनेता और डीएमडीके प्रमुख कैप्टन विजयकांत का तमिलनाडु के चेन्नई के एक अस्पताल में निधन हो गया. कोविड​​-19 की पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद वह वेंटिलेटरी सपोर्ट पर थे.

पीएम मोदी ने विजयकांत के निधन पर शोक व्यक्त किया

तमिलनाडु सरकार ने डीएमडीके के संस्थापक-नेता विजयकांत का अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ करने की घोषणा की है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कषगम (डीएमडीके) के संस्थापक विजयकांत के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उनके निधन से तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना मुश्किल होगा. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा कि विजयकांत जी के निधन से बेहद दुखी हूं. वह तमिल फिल्म जगत के एक किंवदंती रहे, जिन्होंने अपने करिश्माई प्रदर्शन ने लाखों लोगों के दिलों पर राज किया. आगे प्रधानमंत्री ने कहा कि एक राजनीतिक नेता के रूप में वह सार्वजनिक सेवा के लिए बेहद प्रतिबद्ध थे. उन्होंने तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य पर एक स्थाई प्रभाव छोड़ा. उनके निधन से एक शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना मुश्किल होगा.

समर्थकों का रो-रोकर बुरा हाल

डीएमडीके समर्थकों ने अभिनेता और डीएमडीके प्रमुख कैप्टन विजयकांत निधन की खबर के बाद उनके चाहने वालों का रो-रोकर बुरा हाल है. विजयकांत को प्यार से कैप्टन के नाम से जाना जाता है. बताया जा रहा है कि उनकी कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा था जहां गुरुवार सुबह उन्होंने आखिरी सांस ली.

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कुछ दिन पहले अस्पताल से लौटे थे अपने घर

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो सर्दी और खांसी के गंभीर लक्षण होने के बाद उनका इलाज किया गया था. इसके बाद वह 11 दिसंबर को घर लौटे थे. उस समय एमआईओटी अस्पताल की ओर से कह गया था कि 71 वर्षीय नेता विजयकांत पूरी तरह से ठीक हो गए हैं और घर लौट गए हैं.

राजनीतिक में एंट्री कब ली विजयकांत

विजयकांत की बात करें तो वह 2006 के विधानसभा चुनावों में 8 प्रतिशत वोट शेयर के साथ विधायक बने थे. इसके बाद विजयकांत की तमिलनाडु की राजनीति में एंट्री हुई थी. बाद में वह 2011 से 2016 तक तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता बन रहे. उनके स्वास्थ्य की वजह से पार्टी को भी नुकसान हुआ. ‘कैप्टन’ विजयकांत का स्वास्थ्य पिछले कुछ वर्षों से लगातार खराब चल रहा था. वह राजनीतिक गतिविधियों से कुछ दिनों से दूर थे. उनकी पत्नी प्रेमलता पार्टी का कामकाज देख रहीं थीं.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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