Vada Pav Girl : कौन है बड़ा पाव गर्ल चंद्रिका दीक्षित, जिसके वायरल वीडियो पर दिल्ली पुलिस को देनी पड़ी सफाई

Vada Pav Girl चंद्रिका दीक्षित का एक वीडियो वायरल है, जिसमें वो रोती हुई दिख रही थी. इस वीडियो के वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस को सफाई देनी पड़ी है.

Vada Pav Girl : वड़ा पाव गर्ल की गिरफ्तारी की खबर सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने शनिवार को इस वायरल वीडियो की सच्चाई बताई. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बड़ा पाव गर्ल के नाम से पहचानी जाने वाली चंद्रिका दीक्षित को गिरफ्तार नहीं किया गया है, ना ही उनके खिलाफ कोई केस दर्ज कराया गया है. चंद्रिका दीक्षित दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में एक फूड स्टाॅल चलाती हैं, जिसमें वो बड़ा पाव बेचती हैं. हालांकि बड़ा पाव गर्ल का जो वीडियो वायरल है उसमें पुलिस उसे हिरासत में लेकर जाती दिख रही है.


क्या है मामला

गौरतलब है कि बड़ा पाव गर्ल चंद्रिका दीक्षित ने कुछ दिनों पहले एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उसके साथ स्थानीय लोगों की बहस हो रही थी. दरअसल बड़ा पाव गर्ल ने अपने फूड स्टाॅल में एक फेस्ट का आयोजन किया था. जिसके बाद वहां पर भारी भीड़ जमा हो गई और रोड जाम हो गया था. पुलिस का कहना है कि वे स्थानीय लोगों की शिकायत पर वहां गए थे, क्योंकि चंद्रिका दीक्षित ने एमसीडी से दुकान लगाने की कोई इजाजत नहीं ली है. शिकायत पर पुलिस वहां गई और बड़ा पाव गर्ल को अपने साथ थाने लेकर गई थी, जिसे उनकी गिरफ्तारी से जोड़कर बताया जा रहा है. जबकि यह सच नहीं है. चंद्रिका दीक्षित के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है और ना गिरफ्तारी हुई है. पुलिस की ओर से यह बताया गया है कि जब उसके ठेले के पास भारी भीड़ थी और लोगों की शिकायत मिली थी तो कुछ देर के लिए उसे हिरासत में लिया गया था, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और ना ही कोई मामला दर्ज हुआ है.

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कौन है चंद्रिका दीक्षित?

चंद्रिका दीक्षित एक फूड स्टाॅल चलाती हैं, लेकिन इंस्टाग्राम पर उनके 53 हजार फाॅलोअर्स हैं. उनका बड़ा पाव का स्टाॅल काफी चर्चित है, जहां वो लोगों को 50 रुपये में बड़ा पाव खिलाती हैं. जानकारी के अनुसार कुछ पारिवारिक परेशानी की वजह से उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी थी और उसके बाद उन्होंने घर चलाने के लिए स्ट्रीट फूड का स्टाॅल लगाना शुरू किया और आज काफी चर्चित हैं. चंद्रिका दीक्षित मूलत: इंदौर की रहने वाली हैं. इनका छोटा बच्चा है और पति भी काम में सहयोग करते हैं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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