UP News: योगी सरकार की नीतियों पर किसानों का भरोसा, धान खरीद में दिखा उत्साह

UP News: धान खरीद सत्र 2025-26 में उत्तर प्रदेश के किसानों का भरोसा एक बार फिर सरकारी खरीद व्यवस्था पर दिखा है. योगी सरकार द्वारा शुरू किए गए पंजीकरण अभियान में अब तक 1.37 लाख से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया है. राज्य सरकार का लक्ष्य 4000 क्रय केंद्र स्थापित करने का है, जिनमें से 3790 केंद्र पहले ही चालू हो चुके हैं.

UP News: खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, किसानों की सुविधा के लिए ओटीपी आधारित सिंगल रजिस्ट्रेशन प्रणाली लागू की गई है. किसान मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से प्राप्त ओटीपी से पंजीकरण कर रहे हैं. बिक्री का भुगतान सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खाते में किया जा रहा है.

23 दिनों में 35.63 हजार मीट्रिक टन से अधिक धान की हो चुकी है खरीदा

फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, अलीगढ़ और झांसी मंडलों में धान खरीद जारी है. 23 दिनों में 35.63 हजार मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा जा चुका है. लखनऊ संभाग के हरदोई, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जिलों में भी खरीद प्रारंभ है.

सरकार ने MSP में की बढ़ोतरी

सरकार ने इस वर्ष धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी करते हुए कॉमन धान का भाव 2369 रुपये और ग्रेड-ए धान का भाव 2389 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. साथ ही, किसानों को 48 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. क्रय केंद्र प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुले रहते हैं और 17 प्रतिशत नमी तक का धान खरीदा जा सकता है.

28 फरवरी 2026 तक जारी रहेगी धान खरीद

पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान खरीद 1 नवंबर से शुरू होगी. यह चरण चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, देवीपाटन, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर और प्रयागराज संभाग के अलावा लखनऊ, रायबरेली और उन्नाव जिलों में चलेगा. यह प्रक्रिया 28 फरवरी 2026 तक जारी रहेगी.

60 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य

खरीद सत्र के दौरान राज्य सरकार ने 60 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है. अधिकारियों के अनुसार, इस बार किसानों को क्रय केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें समय पर भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिल रहा है.

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लेखक के बारे में

Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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