UGC-NET की परीक्षा स्थगित, नया शिड्‌यूल जारी, 40 प्रतिशत अंक लाकर कर सकते हैं परीक्षा पास

UGC-NET National Testing Agency : परीक्षा हाॅल में प्रवेश के लिए परीक्षार्थियों को एडमिट कार्ड प्रिंट करके लाना होगा. इसके अलावा एक आईडी प्रूफ और एक फोटो भी लेकर परीक्षार्थियों को एग्जामिनेशन सेंटर जाना होगा.

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने आज UGC-NET दिसंबर 2020 और जून 2021 की होने वाली परीक्षाओं को स्थगित कर उसे रि-शिड्‌यूल किया है. यह परीक्षा 6-8 अक्टूबर और 17-19 अक्टूबर को आयोजित की जाने वाली थी, जिसे अब 17-25 अक्टूबर के बीच आयोजित किया जायेगा. एनटीए के अनुसार 10 अक्टूबर को कुछ परीक्षाओं के कार्यक्रम के बीच टकराव होने की वजह से परीक्षा को रि-शिड्‌यूल किया गया है.

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जिन उम्मीदवारों ने यूजीसी नेट की परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था, वे आधिकारिक वेबसाइट- ugcnet.nta.ac.in पर जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. एडमिट कार्ड में परीक्षा तिथि के अलावा एग्जाम सेंटर, रोल नंबर, एप्लीकेशन नंबर और रिपोर्टिंग टाइम का जिक्र होगा.

परीक्षा हाॅल में प्रवेश के लिए परीक्षार्थियों को एडमिट कार्ड प्रिंट करके लाना होगा. इसके अलावा एक आईडी प्रूफ और एक फोटो भी लेकर परीक्षार्थियों को एग्जामिनेशन सेंटर जाना होगा.

UGC NET की परीक्षा तीन घंटे की होगी जिसमें आब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जायेंगे. प्रत्येक विषय के लिए दो पेपर होते हैं. पेपर 1 में 50 और पेपर 2 में 100 प्रश्न पूछे जायेंगे. नवीनतम नियमों के अनुसार, परीक्षा पास करने के लिए, उम्मीदवारों को कम से कम 40 प्रतिशत अंक लाना होगा जबकि आरक्षित कोटि के लिए 35 प्रतिशत अंकों की आवश्यकता है.

Posted By : Rajneesh Anand

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

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रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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