सिनेमा से सत्ता तक: विजय का ‘थलापति’ से ‘थलाइवन’ और ‘मुधलवन’ बनने तक का सफर

Thalapathy Vijay: तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय ने अपने करियर की शुरुआत एक साधारण अभिनेता के रूप में की थी, लेकिन आज वह एक बड़े राजनीतिक चेहरे के रूप में उभरे हैं. 51 साल के विजय अब ‘थलापति’ (कमांडर) से आगे बढ़कर ‘थलाइवन’ (नेता) और ‘मुधलवन’ (मुख्यमंत्री) की छवि गढ़ने में सफल रहे हैं.

Thalapathy Vijay: जब अभिनेता-नेता विजय बार-बार दावा कर रहे थे कि साल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) और सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के बीच सीधा मुकाबला है, तो कई लोग उनकी बात मानने को तैयार नहीं थे. लेकिन यहीं हुआ और ऐसा हुआ जो किसी चमत्कार से कम नहीं. जिस समय विजय तमिल वेत्री कझगम (TVK) के लिए प्रचार कर रहे थे वो आम प्रचार की तरह नहीं था. उन्होंने न बड़ी रैलियां निकाली, न रोड शो किया. विजय ने सोशल मीडिया और अपने फैन बेस के जरिए सीधा संवाद स्थापित किया. उन्होंने खासतौर पर युवाओं और बच्चों को टारगेट किया, ताकि वे अपने परिवारों को प्रभावित कर सकें.

विजय ने बनाई राजनीतिक पहचान

विजय ने द्रविड़ विचारधारा और तमिल राष्ट्रवाद को मिलाकर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई. विजय ने हमेशा से ही लीक से हटकर कदम उठाए. एक दिन वह अचानक से साइकिल लेकर रिहायशी इलाके की तंग गलियों से गुजरे और देखते ही देखते उनके इर्द-गिर्द भारी भीड़ जुट गई, जिससे एक साधारण पल भव्य नजारे में बदल गया. इसी तरह एक फिल्म समारोह के मंच पर विजय ने सरल, लेकिन गहरे अर्थों वाली कहानियां सुनाना शुरू किया, जिनमें सत्ता में बैठे लोगों के लिए तीखे संदेश छिपे हुए थे. विजय के हर शब्द पर आयोजन स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता था, जिससे दर्शकों के साथ उनके स्पष्ट भावनात्मक जुड़ाव की झलक मिलती थी.

सिनेमा से राजनीति तक का सफर

न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए फिल्म पूवे उनक्कगा के निर्देशक विक्रमन ने ने बताया- उस समय भी मुझे पूरा भरोसा था कि विजय आगे चलकर फिल्म उद्योग पर राज करेंगे. मुझे पता था कि उनमें कुछ खास है, जो लोगों को उनका दीवाना बना देगा. ‘घिल्ली’ और ‘मधुरेय’ के संवाद लेखक और ‘अजहगिया तमिल मगन’ और ‘बैरावा’ के निर्देशक भरतन ने भी विक्रमन की बात से इत्तफाक जताया. पूवे उनक्कगा विजय के करियर की पहली सुपरहिट फिल्म साबित हुई. बाद में उन्होंने भावनाओं, पारिवारिक विषयों, हास्य, उच्च-स्तरीय एक्शन और हिट गीतों के सदियों से आजमाए एवं परखे गए फॉर्मूले के सहारे खुद को एक मेगास्टार के रूप में स्थापित किया. उनकी फिल्मों में धीरे-धीरे राजनीतिक संदेश भी शामिल होने लगे, जिससे उनकी सियासी छवि मजबूत हुई. ‘विजय मक्कल इयक्कम’ (VMI) के जरिए उनके प्रशंसकों ने पहले ही स्थानीय निकाय चुनावों में सफलता हासिल की थी. यही नेटवर्क आगे चलकर TVK की ताकत बना और चुनाव में अहम भूमिका निभाई.

समर्थकों को अलग अंदाज में संबोधन बनी विजय की पहचान

‘एन नेनजिल कुडियिरुक्कुम…नानबा, नानबी’ (दोस्तों, आप मेरे दिल में रहते हैं) अपने प्रशंसकों और समर्थकों को संबोधित करने के लिए विजय का पसंदीदा वाक्यांश है. जयललिता सहित कुछ अन्य कद्दावर नेताओं की तरह ही विजय ने भी मीडिया को शायद ही कभी साक्षात्कार दिए और वह हमेशा से ही सार्वजनिक मंचों पर कम बोलते रहे हैं. फिल्म ‘थलाइवा’ की टैगलाइन ‘Born to Lead’ से लेकर ‘मर्सल’ और ‘सरकार’ जैसी फिल्मों में राजनीतिक संदेशों तक, विजय ने लगातार अपनी महत्वाकांक्षा के संकेत दिए. सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें जनता के करीब लाया. अपने पहले ही चुनाव में मजबूत प्रदर्शन के साथ विजय ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ पर्दे के ही नहीं, बल्कि राजनीति के भी बड़े खिलाड़ी हैं. उनकी सफलता को तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां एक अभिनेता ने परंपरागत दलों को कड़ी चुनौती दी, और सफल होकर दिखाया.

विजय का फिल्मी सफर

विजय ने 1984 में फिल्म वेत्री (Vetri) से एक बाल कलाकार के रूप में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की. इस फिल्म में विजयकांत मुख्य भूमिका में थे और इसका निर्देशन विजय के पिता एसए चंद्रशेखर ने किया था. इसके बाद 1992 में रिलीज हुई नालइया थीरपू में अपने करियर का पहला लीड किरदार निभाया था. उस समय वह 18 साल के थे. हालांकि, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी थी. 1993 में आई सेंदूरपांडी में विजय ने विजयकांत के छोटे भाई का किरदार निभाया. फिल्म की सफलता में विजयकांत की लोकप्रियता का बड़ा योगदान रहा, और इसने विजय को इंडस्ट्री में पहचान दिलाने में मदद की. विजय के पास करिश्माई व्यक्तित्व और दृढ़ विश्वास का अनूठा संगम है. यही वजह है कि उन्होंने न केवल पर्दे पर एक दमदार नायक की छवि बनाई, बल्कि वास्तविक जीवन में भी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया.

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By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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