लोकसभा में बृहस्पतिवार ( 6 अगस्त ) को 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026' को बिना किसी चर्चा पारित हो गया. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सदन में विपक्ष 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर विरोध कर रहा था. इसी शोर-शराबे के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बिल पेश किया और इसे मंजूरी मिल गई. यह विधेयक पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007, इनकम टैक्स एक्ट, 2025 और फाइनेंस एक्ट, 2026 में संशोधन करता है.
निवेश बढ़ाने और कारोबार आसान बनाने पर सरकार का फोकस
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस बिल का उद्देश्य निवेश को बढ़ावा देना, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को मजबूती देना और कर व्यवस्था में स्पष्टता लाना है. यह बिल इनकम टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026 की जगह लेगा. सरकार के मुताबिक, इससे वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने और कारोबार करने में आसानी बढ़ाने में मदद मिलेगी.
बिल में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े टैक्स लाभ को वर्ष 2041 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है. अब लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, वियरेबल और हियरएबल जैसे उत्पाद भी इस दायरे में शामिल होंगे. इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स को सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर टैक्स छूट देने का प्रावधान किया गया है.
हीरा कारोबार और डिजिटल भुगतान को भी मिलेगा फायदा
भारत को वैश्विक डायमंड ट्रेड हब बनाने के लिए विदेशी डायमंड कंपनियों, ब्रोकरों और नीलामी संस्थाओं को विशेष क्षेत्रों में रफ डायमंड की बिक्री से होने वाली आय पर 31 मार्च 2041 तक टैक्स छूट देने का प्रस्ताव है. वहीं, पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन कर केंद्र सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह ऐसे इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम अधिसूचित कर सके, जिन पर बैंक या सेवा प्रदाता ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकेंगे. इससे डिजिटल भुगतान को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
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