Tamil Nadu Election 2026 Vijay: जोसेफ विजय चंद्रशेखर उर्फ थलापति विजय ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में एक ऐतिहासिक राजनीतिक एंट्री दर्ज कर दी है. 2 फरवरी 2024 को बनी उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) अपने पहले ही चुनाव में जीत की दहलीज पर खड़ी है और राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती नजर आ रही है. महज दो साल पुरानी पार्टी का यह प्रदर्शन तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव संकेत दे रहा है. हालांकि विजय का यह कारनामा चौंकाने वाला जरूर है, लेकिन राज्य की राजनीतिक परंपरा को देखते हुए इसे पूरी तरह अप्रत्याशित भी नहीं कहा जा सकता.
चुनाव आयोग के 1.30 बजे तक के रुझानों के मुताबिक, टीवीके 110 सीटों पर आगे है. तमिलनाडु में कुल 234 विधान सभा सीटें हैं. इस प्रदर्शन के साथ टीवीके ने तमिलनाडु में सालों से चली आ रही डीएमके और एआईडीएमके वाली दो-दलीय राजनीति को चुनौती दी है. अगर मौजूदा रुझान बरकरार रहते हैं, तो यह एक तरह से द्रविड़ राजनीति प्रभुत्व के अंत का संकेत भी है. भारतीय राजनीति में किसी नई पार्टी की पहली जीत हमेशा बड़े बदलाव का संकेत होती है और टीवीके कुछ वैसा ही इतिहास लिखती नजर आ रही है.
अब तक कौन-कौन बना ‘पॉलिटिकल डिसरप्टर्स’?
हालांकि, तमिलनाडु में सिनेमाई बैकग्राउंड से आए नेता छा ही जाते हैं. हां. यह जरूर है कि वे जो हिम्मत दिखाते हैं, वही ऐसा कर पाते हैं. क्योंकि कमल हासन और रजनीकांत ऐसा करिश्मा नहीं कर पाए. अचानक राजनीति में आना और छा जाना, यह पहली बार नहीं हुआ है. अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) ने 1977 में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. एम.जी. रामचंद्रन द्वारा स्थापित इस पार्टी ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में 234 में से 144 सीटें जीतकर तमिलनाडु की राजनीति को बदल दिया. तमिलनाडु में डीएमके के नेता एम करुणानिधि ने भी सिनेमा से राजनीति तक का सफर तय किया था. अम्मा नाम से फेमस रहीं जे जयललिता ने सिल्वर स्क्रीन से जनता के दिलों में प्रवेश किया और फिर राज्य में सत्ता के शिखर तक पहुंचीं.
तमिलनाडु के अलावा आंध्र प्रदेश में एन.टी. रामाराव की अगुवाई में बनी तेलुगु देशम पार्टी ने 1983 में 289 में से 201 सीटें जीतकर रिकॉर्ड कायम किया था. राज्य के दो भागों में बंटने के बाद वर्तमान आंध्र प्रदेश में पवन कल्याण ने भी राज्य में सत्ता परिवर्तन करवाने में अहम योगदान दिया है. 2024 के विधान सभा चुनाव में जीत के बाद उन्हें राज्य का उप मुख्यमंत्री बनाया गया.
इन दो राज्यों के अलावा सन 2000 में बीजू जनता दल ने अपने पहले चुनाव में ही ओडिशा की राजनीति में मजबूत पकड़ बना ली और सत्ता का केंद्र बनी. 2013 के पहले चुनाव में 28 सीटें जीतकर आम आदमी पार्टी ने भी ऐसा ही करिश्मा किया था. इसके अलावा राष्ट्रीय जनता दल और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी जैसी पार्टियों ने भी अपने शुरुआती चुनावों में मजबूत प्रदर्शन कर राज्य की राजनीति को नया आकार दिया.
विजय ने बदल दिया तमिलनाडु का राजनीतिक ढांचा
2026 में एक बार फिर से इतिहास दोहराया जा रहा है. शुरुआती रुझानों में टीवीके ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम जैसी स्थापित पार्टियों को को पीछे छोड़ते हुए एक नई राजनीतिक धुरी बना ली है. यह सिर्फ चुनावी सफलता नहीं, बल्कि राजनीतिक ढांचे में बदलाव का संकेत है, ठीक वैसे ही जैसे पहले कई नई पार्टियों ने अपने-अपने राज्यों में किया था.
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टीवीके का असर और आगे की राह
टीवीके का अपने पहले चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनना उसे उन चुनिंदा पॉलिटिकल डिसरप्टर की श्रेणी में ला खड़ा करता है, जिसने स्थापित राजनीति को चुनौती दी. ऐसी पार्टियों की ताकत सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे राजनीतिक ध्रुवीकरण को तोड़ती हैं, नेतृत्व की लोकप्रियता को वोट में बदलती हैं और जनता के असंतोष को एकजुट करती हैं.
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि टीवीके अब एक प्रयोग नहीं रह गई, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम बन चुकी है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह उभार लंबे समय तक कायम रहता है या सिर्फ एक चुनाव तक सीमित रह जाता है.
