Swami Avimukteshwaranand Controversy: माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला पुलिस और प्रशासन की ओर से कथित तौर पर रोके जाने से छिड़ा विवाद तेज होता जा रहा है. कांग्रेस ने पूरे मामले में सरकार पर जोरदार हमला किया है. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने ट्वीट कर कहा कि आज देश में जो हो रहा है, उसे हम देख नहीं सकते. पिछले 48 घंटों से हिंदू धर्म के सबसे बड़े संत बिना कुछ खाए-पिए धरने पर बैठे हैं. उनसे जाकर माफी मांगने के बजाय, वे आधी रात को उन्हें नोटिस देने की कोशिश कर रहे हैं, और उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठा रहे हैं. खेड़ा ने कहा कि क्या किसी सरकार, किसी डीएम, किसी पुलिस आयुक्त, किसी मुख्यमंत्री, किसी प्रधानमंत्री को शंकराचार्य की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाने का कोई अधिकार है?
संत मठ वाले होते हैं… लठ वाले नहीं- पवन खेड़ा
यूपी सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि जो अत्याचार उत्तर प्रदेश में पिछले 48 घंटे से देख रहे हैं, क्या वो कोई मठ वाला बाबा कर सकता है? उन्होंने कहा- संत मठ वाले होते हैं, संत लठ वाले नहीं होते हैं. ये लठ वाले हमारे हिंदू धर्म पर कब्जा करके बैठे हैं. इन्हें माफ नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा एक तरफ, आज BJP का नया अध्यक्ष बिना चुनाव के चुना जा रहा है तो दूसरी ओर संतों के आंसू गिर रहे हैं.
विरोध किया तो मांगा जा रहा कागज- पवन खेड़ा
कांग्रेस (AICC) मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा- गुरु-शिष्य की एक अखंड परंपरा होती है, उसके तहत शंकराचार्य चुने जाते हैं. लेकिन सरकार आधी रात को नोटिस देकर पूछ रही है कि आप शंकराचार्य हैं या नहीं. उन्होंने लिखा कि जब प्रधानमंत्री मोदी अविमुक्तेश्वरानंद के सामने नतमस्तक हुए तब तक शंकराचार्य थे. जब तक अविमुक्तेश्वरानंद गौ मांस पर सरकार से सवाल नहीं पूछते थे तब तक वे शंकराचार्य थे. जब तक वो आधे-अधूरे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का विरोध नहीं कर रहे थे तब तक वे शंकराचार्य थे. लेकिन अब यह शंकराचार्य नहीं रहे, क्योंकि वो राजा के सामने नतमस्तक नहीं हुए, इसलिए अजय सिंह बिष्ट आज इनसे कागज मांग रहे हैं.
देश नहीं करेगा माफ- पवन खेड़ा
खेड़ा ने कहा जो 10 साल से अपनी फर्जी डिग्री छिपा रहे हैं, आज वह दूसरे को नोटिस भेज रहे हैं. 1954 में सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि मठ के संचालन में हस्तक्षेप का किसी को अधिकार नहीं है. ऐसे में अजय सिंह बिष्ट ने जो नोटिस भेजा है, वह कानून का उल्लंघन है. पूरा देश पीएम मोदी और अजय सिंह बिष्ट के मौन को देख रहा है, देश इन्हें कभी माफ नहीं करेगा.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछा गया- कैसे लिख रहे हैं शंकराचार्य?
इससे पहले माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला पुलिस और प्रशासन की ओर से कथित तौर पर रोके जाने को लेकर हुए विवाद के बीच मेला प्रशासन ने उन्हें एक नोटिस जारी कर पूछा है कि वह स्वयं को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रचारित कर रहे हैं. प्रयागराज मेला प्राधिकरण उपाध्यक्ष की ओर से सोमवार जारी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन सिविल अपील का भी जिक्र किया गया है जिसमें कोर्ट ने आदेश दिया था कि जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता.
क्या है विवाद का कारण?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने नोटिस मामले पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के तौर पर पट्टाभिषेक हो चुका था. योगीराज ने बताया कि मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर शंकराचार्य अपनी पालकी में बैठकर शांतिपूर्वक अपने अनुयायियों के साथ संगम स्नान करने जा रहे थे. इसी दौरान पुलिस ने उन्हें पालकी से उतरकर स्नान घाट जाने को कहा. उन्होंने दावा किया कि पालकी से उतरने से मना करने पर पुलिस ने उनके समर्थकों को मारा-पीटा जिसमें करीब 15 समर्थक घायल हुए. योगीराज ने यह भी कहा कि जब तक मेला प्रशासन माफी मांग कर स्वामी जी को प्रोटोकॉल के हिसाब से स्नान की व्यवस्था नहीं करता, वह अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे.
विवाद पर पुलिस ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थक बैरिकेट तोड़कर संगम नोज पर आ गए. भगदड़ की स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया. उन्होंने कहा ‘हमारे पास साक्ष्य है और मुख्य स्नान पर्व पर किसी भी तरह के वाहनों की अनुमति से मना किया गया था. स्नान के लिए किसी ने किसी को नहीं रोका है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बगल में भी कई साधु संत आए और उन्होंने स्नान किया. प्रशासन की ओर से किसी भी साधु संत का अपमान नहीं किया गया. (इनपुट भाषा)
