सुप्रीम कोर्ट ने कहा-डॉक्टरों को मारने वाले नेताओं को हिरासत में लिया जाना चाहिए, उन्हें खुलेआम घूमने की इजाजत नहीं होनी चाहिए

महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में रविवार को शिवसेना के पदाधिकारियों द्वारा डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों पर हमला किए जाने के एक दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी घटनाओं पर तीव्र प्रतिक्रिया दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र में डॉक्टरों की पिटाई की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों के लोगों द्वारा डॉक्टरों की पिटाई चिंता का विषय है. सरकार को चाहिए कि वो ऐसे लोगों को अविलंब हिरासत में लें, उन्हें खुलेआम घूमने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने अस्पताल में डॉक्टरों के साथ मारपीट के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को नोटिस जारी किया है.


म्हात्रे की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट में दी गई है चुनौती

शिवसेना नेता रमेश म्हात्रे को दी गई जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्टमें याचिका दाखिल की गई है, जिसपर कोर्ट ने उनसे जवाब मांगा है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने म्हात्रे को नोटिस जारी किया और राज्य सरकार की याचिका पर तीन हफ्ते में उनसे जवाब मांगा. पीठ ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. कल पालघर में एक और घटना हुई. वही लोगों का समूह. फिर से डॉक्टरों के साथ मारपीट. एक संदेश जाना चाहिए और यह समाज में दूसरों के लिए एक सबक होना चाहिए.

मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी

सुप्रीम कोर्ट म्हात्रे की याचिका समेत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें पार्षद पर जमानत की शर्तें लगाने के मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई थी. बाद में कोर्ट ने शिवसेना पार्षद को अपनी अपील वापस लेने की इजाजत दे दी.सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि हाई कोर्ट का स्वतः संज्ञान लेना और अधीनस्थ अदालत द्वारा म्हात्रे को दी गई जमानत पर रोक लगाना पूरी तरह से सही था. अदालत ने यह भी कहा कि डॉक्टरों पर हमला करने वाले जमानत के हकदार नहीं हैं. 18 जुलाई को हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने आदेश को गलत बताया था और म्हात्रे को पुलिस के सामने सरेंडर करने को कहा था. बाद में सात अगस्त को हाईकोर्ट ने म्हात्रे को जमानत दे दी और आदेश दिया कि मुकदमा तेजी से चलाया जाए और तय समय में पूरा किया जाए.

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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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