राज्यसभा चुनाव : सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के अपील को किया खारिज, बोलीं नेता-यह लोकतंत्र और संविधान के लिए झटका

Supreme Court : मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि किसी उम्मीदवार का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त किए जाने के बाद उसके पास चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं होता. सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन से यह भी पूछा कि क्या वह ऐसा कोई फैसला दिखा सकती हैं, जिसमें अदालत ने इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप किया हो.

Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा उनके नामांकन को रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं करना चाहते और इसे खारिज किया जाता है. न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने कहा, एक बार नामांकन खारिज हो जाने के बाद चुनाव आयोग के पास जाने के अलावा और कोई उपाय नहीं होता है. कोर्ट ने पूछा कि क्या न्यायालय का ऐसा कोई निर्णय है, जिसमें हमने इस चरण में हस्तक्षेप किया हो?

यह लोकतंत्र के लिए झटका है

सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका किए जाने के बाद कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह कोई उनके लिए व्यक्तिगत झटका नहीं है. यह भारतीय लोकतंत्र और भारत के संविधान के लिए झटका है. मैंने शुरू में ही कहा था कि इलेक्शन कमीशन की सरकार के सांठगांठ है और वह साबित भी हो गया है. मुझे कोर्ट के बारे में कुछ नहीं कहना है, कोर्ट ने तो कम से कम हमारा पक्ष सुना है और अपना एक फैसला दिया है. चुनाव आयोग से तो जब हमारे लोगों ने बात की तो, उन्होंने 48 घंटे तक हमें जवाब नहीं दिया.

नटराजन के वकील ने कोर्ट में कहा-केवल आपराधिक मामलों की जानकारी देना जरूरी होता है

मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि किसी उम्मीदवार को केवल वही आपराधिक मामला घोषित करना होता है, जिसमें न्यूनतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान हो. उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में केवल समन जारी हुए थे.सिंघवी ने कहा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए नटराजन का नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक आपराधिक मामले का खुलासा न करने के आरोप में गलत तरीके से खारिज कर दिया है.

9 जून को खारिज हुआ था मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र

राज्यसभा चुनाव के लिए मध्यप्रदेश से कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन 9 जून को रिटर्निंग ऑफिसर ने शपथपत्र में जानकारी छिपाने के आधार पर खारिज कर दिया था. जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग पर बीजेपी सरकार के साथ जुगलबंदी करने का आरोप लगाया और कहा कि देश उस ओर जा रहा है जहां लोकतंत्र खतरे में है और विपक्ष की भूमिका को शून्य करने की कोशिश की जा रहा है.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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